टीचर ने शिखाया सबक। Teacher ne Sikhaya Sabak

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मुन्ना, कार्तिक, श्रेयांश और तुषार बचपन के जिग्री दोस्त थे।

चारो के पिता बड़े बिजनेसमैन थे, पैसे की बिल्कुल भी कमी नहीं थी। चारो को पढ़ाई लिखाई में बिल्कुल भी रुचि नहीं थी।

चारो को खाने, सोने और घूमने मै सारा दिन बिताया करते थे।

मुन्ना:- आज की मूवी तो बड़ी ही मजेदार थी, क्या सुपर कूल स्टंट किया रितिक ने।

तुषार:- हा मै भी सोच रहा हूं, पिताजी से बात कर एक फिल्म का निर्माण करू।

कार्तिक:- पहले एक्टिंग तो सीख ले, फिर हीरो बनना।

तुषार:- एक्टिंग की क्या जरूरत है, मै डांस तो रितिक से अच्छा करता हूं।

श्रेयांश:- वो सब छोड़ो कल के एग्जाम का क्या करना है, मैंने पिछले कुछ हफ्तों से किताब नहीं खोली है।

मुन्ना:- हे भगवान, कल के एग्जाम, मै तो भूल ही गया था।

अचानक चारो को कल के एग्जाम के बारे में याद आता है और चारो तनाव में आ जाते है।

तुषार:- हे भगवान, टीचर ने मेरे पिता से शिकायत की तो फिल्म घर पर ही बन जाएगी।

मुन्ना:- हा सही कहा, मेरे पिता तो मेरी पॉकेट मनी, बाइक सब बंद कर देंगे।

कार्तिक:- मज़े करो दोस्तो इतना क्यू घबरा रहे हो, जब तक कार्तिक तुम्हारे साथ है तब तक डरने की कोई बात नहीं।

वो सभी परीक्षा देने के लिए तैयार नहीं थे इसलिए वो परीक्षा से बचने के लिए नए तरीके ढूंढने लगे।

कार्तिक:- एक तरकीब है, चलो मेरे साथ जल्दी।

चारो दोस्त मैदान में आ जाते है जहां बहुत कीचड़ है।

मुन्ना:- यहां क्यों लाए हो कार्तिक ?

तुषार:- मेरा क्रिकेट खेलने का बिल्कुल भी मन नहीं है, हर जगह पिताजी ही दिखाई दे रहे है।

कार्तिक:- सब ये कीचड़ अपने कपड़ों में लगाओ।

श्रेयांश:- कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए ?

कार्तिक:- पहले लगाओ।

कार्तिक के कहने पर उन चारो दोस्तो ने बिना सोचे समझे अपने कपड़ों में कीचड़ लगा लिया।

इस प्रकार गंदे हालत और पसीने से लथपथ चारो दोस्त अपने टीचर के घर पहुंच जाते है।

टीचर:- ये क्या हालत बन गई है तुम्हारी बच्चो, सब ठीक तो है।

कार्तिक:- हम सब मेरे गांव मेरी बीमार दादी को देखने गए थे, लौटते समय हमारी कार कीचड़ में फस गई और टायर भी फट गया हम गाड़ी को धक्का लगाते लगाते हम अभी शहर पहुंचे है।

टीचर:- ये बहुत बुरा हुए लेकिन तुम घर जाने के बजाय यहां क्यों आए हो ?

मुन्ना:- टीचर, हमारी कल की टेस्ट की तैयारी पूरी नहीं हुई है।

टीचर:- ठीक है, कोई बात नहीं तुम सब 3 दिन बाद टेस्ट देना।

श्रेयांश:- हम सब पूरी तैयारी कर के टेस्ट देंगे, धन्यवाद टीचर।

3 दिन बाद सारे बच्चे पढ़ाई कर के एग्जाम के लिए क्लास में पहुंचते है।

कार्तिक:- टीचर हम एग्जाम के लिए तैयार है।

टीचर:- बहुत अच्छे, पर सबको अलग अलग क्लास में बैठना होगा।

टीचर ने सब बच्चो को अलग अलग क्लास रूम में बैठा देता है।

सब बच्चे आश्चर्य चकित हो जाते है।

परीक्षा में सिर्फ दो ही सवाल आते है।

1. पूरा नाम

2. कार का कौनसा टायर फट गया था ?

दूसरा सवाल देख के सभी बच्चो को अपनी गलती का एहसास होता है।

टीचर:- कैसा रहा परीक्षा बच्चो ?

स्टूडेंट्स:- टीचर, हमे माफ कीजिए हम कभी झूठ का सहारा नहीं लेंगे।

टीचर:- ठीक है बच्चो, अपनी गलती की जिम्मेदारी लोगे तो जिंदगी में बहुत आगे बढ़ोगे नहीं तो जिंदगी तुम्हे सबक सिखाएगी।

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About Devashish Markam

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