साधु के वरदान। Sadhu Ke Vardaan। Cartoon Story in Hindi

0 Shares

कई साल पहले एक गांव में 3 भाई रहा करते थे। जब वह बहुत छोटे थे उनके मां-बाप गुजर गए।

उनके लिए एक छोटा सा घर, थोड़ी बहुत खेत और एक आम का पेड़ उनके मां-बाप उनके लिए पीछे छूट गए थे।

वह तीन भाई आम के पेड़ से आम तोड़कर उन्हें बेच कर अपना गुजारा किया करते थे उनको पैसा बहुत कम पैसे थे इसलिए गरीबी की हालत में वो अपना दिन गुजरते थे।

एक दिन उनके गांव में साधु महाराज पधारे। वह साधु महाराज तपस्वी और बहुत शक्तिमान थे। उस साधु के बारे में इन दिनों भाइयों ने सुना कि वह सब को वरदान दे रहे हैं।

उन भाइयों ने सुना तो उन्होंने निश्चय किया कि वह साधु महाराज से मिलकर उनसे वरदान मांग जिंदगी सुधार लेंगे।

पहले सबसे बड़ा भाई गया और साधु महाराज से मिला उनको कई तरीकों से उनको खुश किया अपने पेड़ के कुछ आम वो ले गया था उसेने वह आम साधु महाराज को अर्पित किया।

साधु महाराज ने वह आम खाए आम बड़े ही मीठे थे। वह बहुत खुश हुए उन्होंने कहा ” बेटा तुम्हे क्या चाहिए मांगों “

बड़ा भाई कहता ” मुझे कई सारे गाय चाहिए। “

साधु महाराज ने आशीर्वाद देते हुए कहा ” तथास्तु “

जब बड़ा भाई घर लौटा तो देखा उसके घर के सामने कई सारे गाय है।

साधु महाराज से वरदान पा के वह बहुत खुश था। इसके बाद दूसरा भाई साधु महाराज के पास पहुंचा फिर उनको आम दे कर बहुत विनम्रता से प्रणाम की किया।

दूसरे भाई की विनम्रता से प्रणाम करता देख साधु महाराज बहुत खुश हैं और उन्होंने पूछा ” मांगो तो मैं जो मांगना है

दूसरा भाई कहता ” महाराज मेरी जमीन बंजर है उसे उपजाऊ जमीन बना दीजिए, उससे उपजाऊ फसल बना सकूं ऐसा वरदान दीजिए। “

साधु महाराज ने आशीर्वाद देते हुए कहा ” तथास्तु “

बस फिर क्या था बंजर जमीन में बदल गया। उसके बाद तीसरा भाई उस साधु महाराज के पास गया। उसने भी साधु महाराज की जम के सेवा की।

तीसरा भाई ने साधु महाराज से कहां ” महाराजा आप जैसे महापुरुष के आशीर्वाद की मुझे बहुत जरूरत है। “

उसके प्रेम और आदर से साधु महाराज बहुत प्रभावित हुए।

साधु महाराज ने कहा ” ठीक है, तुम्हें जो चाहिए मांग लो

तीसरे भाई ने कहा ” महाराज मैं सोच रहा था मैं शादी कर लूं मुझे सही कन्या दिखाइए “

साधु महाराज ने आशीर्वाद देते हुए कहा ” तथास्तु “

जब तीसरा घर पहुंचा तब उसने देखा कि उससे शादी करने के लिए एक खूबसूरत सी लड़की उसका इंतजार में खड़ी थी। उन दोनों की शादी हो गई।

कुछ दिन बाद हो साधु महाराज तीर्थ यात्रा पर चले गए साधु महाराज के वरदान के कारण उन तीनों भाइयों ने बहुत ही कम समय में बहुत सारा पैसा कमाया और उनकी जिंदगी सुधर गई।

कुछ साल बाद अपने तीर्थ यात्रा खत्म करके साधु महाराज लौटने लगे तो उन्होंने तीनों भाइयों की बात याद आई।

साधु महाराज ने सोचा ” पता नहीं वह कैसे हैं, मेरे दिए वरदानों का क्या वह सही उपयोग कर रहे है। ” ये सोच कर साधु महाराज को उनसे मिलने का मन हुआ।

उस रात साधु महाराज एक गांव के बाहर एक मंदिर में रहे और सुबह होते ही गांव में आ गए।

उन्होंने ठान लिया कि तीनों भाइयों का परीक्षा लिया जाए।

उन्होंने एक भिखारी का रूप धारण किया और फिर सबसे बड़े भाई के घर पहुंच कर आवाज लगाई ” भिक्षा आं देही माता, थोड़े दूध दान में दे दो “

तब्बड़ा भाई घर से बाहर आया ओर उस भिखारी को डाटा ” कोई और काम धंधा नहीं है, जब देखो भीख मांगने चले आते है, सुबह सुबह मेरा ही घर मिला था क्या? अपनी मनहूस सकल के कर निकल जा ”

तब साधु महाराज अपनी असली रूप में आ गए।

साधु महाराज गुस्से से ” तेरे जैसा दुरा चरी को मैंने उस दिन वरदान दिया वो मेरी गलती थी तुम्हारी आंखें सर पर चढ़ गई है इसलिए मैं अपने वरदान को वापस लेता हूं “

यह कहकर बहुत गुस्से में साधु महाराज वहां से चले गए उसके बाद बड़े ने अपनी सारी संपत्ति खो दी और वह वापिस गरीब बन गया।

इसके बाद फिर से साधु महाराज ने भिखारी का रूप धारण कर दूसरे भाई के घर जा पहुंचे।

साधु महाराज घर के आंगन में खड़े हो कर जोर से चिल्लाते है ” थोड़े चावल दान में दे दो “

घर के अंदर से दूसरा भाई बाहर आया उसने कहा ” यहां कोई मुफ्त का खाना बांट रहा है क्या भीख मांगने में शर्म नहीं आती ” ठीक है कर दूसरे भाई ने साधु महाराज के वहां से भगा दिया।

उसकी बातें सुनकर साधु महाराज बहुत क्रोधित हुए ” मुझे पहचान नहीं पाया, तुझे वरदान देना मेरी गलती थी तू उस वरदान के लायक नहीं है तेरा वरदान मैं अभी वापस लेता हूं “

यह कहकर वह वहां से चले गए पलक झपकते ही दूसरे भाई का सारा संपत्ति भी गायब हो गया।

फिर वहां से साधु उसी भिकारी के रूप में तीसरे भाई के घर जा पहुंचा।

शाम हो रहा था और ठंडी हवा चल रही थी तभी साधु महाराज कांपते हुए ” महाशय बाहर बहुत ठंड है आज रात के लिए क्या आप मैं आपकी दहलीज पर सो सकता हूं “

मिश्रा भाई बाहर आया और कहां ” पहले आप घर के अंदर तो आइए “

फिर वह उसे घर ले जाकर अच्छे से खाना खिला कर अच्छी तरह से विश्राम का आयोजन किया।

साधु महाराज बहुत खुश हुए। सुल्तान जागने के बाद उन्होंने तीसरे भाई को अपने असली रूप बताई इतना ही नहीं सबका सहायता करते हुए प्रेम से रहने वाली धर्मपत्नी को उन्होंने आशीर्वाद दिया।

सिर्फ इतना ही नहीं उस रात को गांव के बाहर उत्तर दिशा में पीपल के पेड़ के पास जाने को कह कर साधु महाराज वहां से चले गए।

उस रात तीसरा भाई अपनी पत्नी के साथ उस पेड़ के पास जा पहुंचा और क्या देखा वहां स्वर्ण मुद्राओं से भरी हुई मटकी रखी हुई थी। फिर उन्होंने वह घर ले आया।

उनको समझ में आया कि यह सब साधु महाराज का आशीर्वाद था।

इसके बाद वह दोनों सारी जिंदगी दान धर्म करते हुए बहुत ही प्यार से बिताते थे।

शिक्षा:- जिससे जितना हो सके गरीबों कि सहायता करना चाहिए।

0 Shares
About Devashish Markam

Hi I am Devashish Markam and I'm the co-founder of hindistoryhub.inand we can assure you that we will keep you updated with the best Hindi stories out there.Until then Goodbye.

Leave a Reply

0 Shares
Copy link