सच्चे दोस्त। Sacche Dost । Story in hindi

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वरुण और धवन अच्छे दोस्त थे। वरुण सब्जी वाले का बेटा था और धवन शौकार का बेटा। दोनो एक साथ विद्यालय जाया करते थे। दोनो पढ़ाई में भी अच्छे थे।

धवल विद्यायल में पहला आता और वरुण दूसरा। धवल अमीर था पर इस बात का घमंड बिल्कुल नही था। धवल के स्वभाव में एक खामी थी, उसे गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता था।

एक बार विद्यालय के परीक्षा का परिणाम आने पर कक्षा के सारे बच्चे आश्चर्य हो जाते है।

शिक्षक:- हर बार धवल कक्षा में पहला आता है और वरुण दूसरा लेकिन इस बार का परिणाम अनोखा है। इस साल वरुण ने धवल को पीछे छोड़ पहला स्थान हासिल किया। उसकी इस कामयाबी के लिए हमे उसे बधाई देनी चाहिए।

कक्षा के सारे बच्चे वरुण की कामयाबी की बधाई देते है। एक तरफ वरुण अपनी कामयाबी पर खुश था और दूसरी तरफ धवल को हार बरदश नही हो रही थी।

कक्षा के बाद धवल अकेला समुद्र किनारे अकेला बैठा होता है।

वरुण:- धवल, तुम अकेले क्यों बैठे हो। चलो समुद्र में जा कर दुपकिया लगते है।

धवल:- मुझे तुमसे बात नहीं करनी, तुमने परीक्षा में छल कर पहला स्थान हासिल किया है।

वरुण:- ये तुम क्या बोल रहे हो धवल। तुम्हे पता है, मै कभी छल नहीं करता।

धवल की इस कड़वी बातो से वरुण दुखी होता है और रेत पर कुछ लिखने लगता है।

वरुण की लिखी हुई शब्द पढ़ कर धवल खुद पर शर्मिंदा होता है।

” आज धवल ने मुझसे झगड़ा किया और मुझे धोखेबाज कहा “

धवल:- ये मैंने ठीक नहीं किया। वरुण एक अच्छा दोस्त है, वो कभी छल नहीं करेगा। उसने अपनी मेहनत से पहला स्थान हासिल किया है। मुझे उसकी इस कामयाबी की बधाई देनी चाहिए थी जैसे वो हमेशा मुझे मेरी कामयाबी पर दिया करता था और मैंने उसे धोखेबाज कहा। वरुण मुझे कभी माफ नहीं करेगा।

धवल ये सोच रहा होता है की समुद्र किनारे भगदड़ मच गई। सब जोर शोर से चिलाने लगे ” वो बच्चा डूब जाएगा कोई बचाओ उसे, कोई बचाओ, कोई बचाओ। “

धवल अपने दोस्त वरुण को डूबता देख धवल तेजी से दौड़ता हुआ समुद्र में छलांग मार वरुण की ओर बढ़ने लगता है।

वरुण:- बचाओ, बचाओ, मुझे कोई बचाओ।

धवल:- मै आ गया दोस्त।

तभी समुद्री सुरक्षा रक्षकों का समूह नौका ले कर उनके पास पहुंच जाती है और उन दोनों को नौका में सुरक्षित चढ़ा लेती है।

कप्तान:- तुम्हे बड़ी बहादुरी का काम किया है बच्चे।

वरुण:- शुक्रिया दोस्त मै तुम्हारा ये उपकार कभी नहीं भूलूंगा।

धवल:- वरुण मै तुमसे माफी मांगता हूं थोड़ी देर पहले मैंने गुस्से में आ कर तुम्हे बहुत बुरा भला कहा।

वरुण मुस्कुराता है और धवल को एक बड़े से पत्थर के पास ले जाता है। वरुण उस बड़े पत्थर पर लिखने लगता है।

धवल:- तुम ये क्या लिख रहे ही वरुण, कुछ देर पहले जब मेरा तुमसे झगड़ा हुआ था तब भी तुमने रेत पर कुछ लिखा था और अब यहां ऐसा क्यों ?

वरुण:- वो इसलिए क्यों की कौनसी याद हमे संभालनी है और कौनसी याद मिटानी है वो हमे तय करना होता है।

धवल:- मतलब, मै कुछ समझा नहीं।

वरुण:- तुमने जो कड़वी बात मुझसे कहीं वो मैंने कबकी भुला दी उस रेत पर लिखे शब्दों की तरह, लेकिन अभी जो शब्द इस पत्थर पर लिख रहा हूं वो आसानी से मिटने वाली नहीं क्यों की ये अच्छी याद है और मै इसे संभालना चाहता हूं। इन पत्थरों पे लिखे शब्दों की तरह, अब समझे।

धवल:- वाह कितनी बड़ी बात कही तुमने, मै इसे हमेशा याद रखूंगा।

वरुण:- कहते है, कभी किसी से माफी मांग लेनी चाहिए और कभी किसी को माफ कर देना चाहिए तभी तो रिश्ते मजबूत होते है।

धवल:- तुम मेरे अच्छे दोस्त हो वरुण।

वरुण:- और तुम भी, चलो अब घर चलते है।

वरुण और धवन की इस चोटी सी लड़ाई के बाद दोनों एक बार फिर से अच्छे दोस्त बन जाते है और उनकी दोस्ती पहले से ज्यादा पक्की हो जाती है।

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About Devashish Markam

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