सच्चे दोस्त। Sacche Dost। Friendship Story in Hindi

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कई साल पहले एक जंगल में एक खरगोश रहा करता था। वह हर रोज जंगल में शैतानी करता खेलता, कूदता, घूमता रहता।

पर बेचारे की तबीयत एक दिन बहुत बिगड़ जाती है। उसकी बीमारी के बारे में एक से दूसरे दूसरे से तीसरा कर सारे जानवरों को पता चल जाता।

जंगल के सारे जानवर इकट्ठा हो गई खरगोश का हाल जानने निकल पड़ते। सबसे पहले एक बंदर खरगोश के घर की ओर निकल पड़ता है।

बीमारी की हालत में तपती बुखार में पढ़ा हुआ खरगोश को देखते देखते उसने कहा ” दोस्त तुम्हें हल्की सी बुखार है घबराने की बात नहीं यह तो खुद से ही उतर जाएगा “

उसने मुफ्त में सलाह दिया इसके बाद उसने खरगोश के पास रखे हुए केले और अमरूद लेकर खरगोश को थोड़ा सांत्वना देखकर वह वापस चला गया।

इसके बाद खरगोश के बीमारी के बारे में सुनकर एक हाथी उसका हाल जानने उसके घर आ पहुंचा और कहां ” मेरे दोस्त, क्या हुआ तुम्हारी तबीयत बिगड़ गई पर कोई बात नहीं हमारे जैसे भारी जंतुओं का भी कभी-कभी तबीयत बिगड़ ही जाता है। तुम तो एक छोटे जानवर हो तुम्हारी बुखार जल्दी उतर जाएगी घबराओ मत। “

उसके बाद उसने खरगोश के जमा किए हुए आलू कैरेट और साबूदाना पेट भर कर खा लिया और वहां से चला गया।

थोड़ी देर बाद एक बिल्ली वहां खरगोश का हाल पूछने वहां आ पहुंची उसने खरगोश से कहा ” दोस्त मौसम बदला है ना इसलिए तुम्हें जरा सा बुखार हो गया है एक दिन आराम कर लोगे तो ऐसे ही कम हो जाएगा। “

इसके बाद उसने खरगोश के घर में रखा हुआ स्वादिष्ट और खुशबूदार घी मक्खन सारा चट कर गया और और ठहाके लगाते हुए वहां से चला गया इसके बाद सियार और लोमड़ी एक साथ खरगोश के यहां पहुंचे उसका हाल जानने के लिए

बीमारी की हालत में लेटा हुआ खरगोश को देख कर कहा ” दोस्त मैं तो कब से तुम्हें कह रहा हूं वह घास फूस खाना छोड़ो और हमारी तरह मांस खाना सीखो तुम्हें तो हमारी बात मानी नहीं इसलिए बीमार हो कर बिस्तर में पड़े हो, हमें देखा मांस खाते हैं और फुर्ती के साथ जीते हैं। “

” वो सब ठीक है तुम तो जल्दी ठीक हो जाओगे यह बताओ हमारे खाने के लिए कुछ छुपा रखा है “ लोमड़ी कहता है।

” वैसे भी तुम तो मेहमानों की बढ़िया ख्याल रखते हो “ लोमड़ी ने कहा। फिर उन दोनों ने सारा घर छान मारा पर उनके लिए खाने को कुछ बचा ही नहीं था। फिर वह दोनों खरगोश पर नाराज होकर वहां से चले गए।

वह दोनों वापिस जा ही रहे थे कि सामने से शेर आ रहा था। दोनों समझ गए शेर, खरगोश के घर ही जा रहा है। उन्होंने कहा ” शेर जी लग रहा है आप खरगोश के घर ही जा रहे हो उसके घर में रखा ही क्या है हमने अच्छी तरह से छान मारा ना कोई हड्डी ना कोई मांस का टुकड़ा “

” हम से पहले जो लोग गए थे उन्होंने उसका घर का सारा खाना खा लिया “ लोमड़ी कहता।

मेहमानों का ख्याल करना तो दूर बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहा इसलिए आपके लिए खरगोश का घर जाना बेकार होगा “ इस तरह उन दोनों ने खरगोश के घर की परिस्थिति शेर को बताई।

फिर शेर नहीं कहा ” तो यह बात है फिर तो खरगोश के घर जाना बेकार ही होगा बेहतर यही होगा कि मैं यही जंगल में शिकार करके अपना पेट भर लू। “

यह कहकर शेर वहां से चला गया।

आखिर में खरगोश का बहुत पुराना मित्र मधुमक्खी वहां जा पहुंचा और वो खाली हाथ नहीं गया था, साथ में दो बोतल शहद लेकर आया था।

फिर खरगोश का नस देखकर उसने कहा ” मेरे दोस्त तुम्हारी बुखार बढ़ गई है मैं अभी वैध को लेकर आता हूं “ यह कहकर वह उड़ गया और भालू के घर जा पहुंचा वह भालू जंगल में कोई भी जानवर बीमार पड़ जाता तो उसकी चिकित्सा करता।

मधुमक्खी उड़ कर आया भालू को सारा विषय बताया फिर उसको साथ लेकर खरगोश के घर आ पहुंचा। भालू ने उसका नब्ज देखा और उसे दवाइयां दी।

दो दिन के अंदर खरगोश का बुखार पूरी तरह से उतर गया। खरगोश दुबारा पहले की तरह तेज तंदरुस्त बनन गया।

सीख:- दुख में जो साथ दे वही सच्चा साथी होता है।

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About Devashish Markam

Hi I am Devashish Markam and I'm the co-founder of hindistoryhub.inand we can assure you that we will keep you updated with the best Hindi stories out there.Until then Goodbye.

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