सचाई की अहमियत। Moral Kids Story in Hindi

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किसी विकाश शील गांव में एक मुन्ना नाम का लड़का रहता था।

मुन्ना के परिवार में उसकी माँ, पिता और दादी थे।

एक दिन मुन्ना अपने घर मे बैठा दादी से बातें कर रहा होता है।

मुन्ना:-दादी, पिताजी इतने खड़ूस क्यों है।

दादी:-(हस्ते हुए) पागल वो तुझसे बहुत प्यार करते है।

मुन्ना:- है, आप तो उनकी ही तरफदारी करोगी ही।

दादी:-(हस्ते हुए) तुम्हारी माँ भी तो तुम्हारी तरफदारी करती है।

इस बात पर दोनों हस पड़ते है। तभी मुन्ना की माँ आ जाती है।

माँ:- क्या बात है, दादी पोते के बीच क्या बातें चल रही है जो इतना ज़ोर ज़ोर से हँसने की आवाज़ आ रही है।

दादी:- वो तो तुम हम दोनों के बीच मे ही रहने दो। तुम आओ बेटे अपनी बातें करो।

माँ:- (हस्ते हुए) ये सही है।

इस बात पर सभी हस् पड़ते है। सभी के हँसने की आवाज़ सुन कर मुन्ना के पिता भी वहा पहुच जाते है।

पिता:- ऐसा क्या हो गया कि सभी को इतनी हँसी आ रही है।

माँ:- जी कुछ नही, बस ऐसे ही मुन्ना की बातों पर हस् रहे थे।

पिता:- तुम ऐसे ही हँसी मज़ाक करते रहना, जा कर पढ़ाई करो।

मुन्ना:- लेकिन पिताजी

पिता:- कोई लेकिन नही, जाओ जा कर पढ़ाई करो। परीक्षा के बाद जो चाहे करना, पर अभी पढ़ाई पर ध्यान दो।

मुन्ना उठ कर अपने कमरे में जाता है और पढ़ने बैठ जाता है। ऐसे ही दिन बीतते जाते है और मुन्ना की परीक्षा खत्म हो जाती है।

स्कूल के बरामदा में उसके दोस्त बातें कर रहे होते है। मुन्ना भी उनकी बातों में शामिल हो जाता है।

मुन्ना:- हे दोस्तों, आज की योजना तैयार है।

पहला मित्र:- है सब कुछ तैयार है। आज हम अपना काम पूरा कर के रहेंगे।

मुन्ना :- किसी तरह की गलती तो नही होगी।

पहला मित्र:- गलती की कोई गुंजाईश नही है, हमने ये सब कुछ बहुत अच्छे से तैयार किया है।

मुन्ना:- ठीक है , आज यही करते है।

स्कूल की घंटी बजते ही सभी बच्चे भागते हुए सभी अपनी अपनी क्लास में चले जाते है। जिसके बाद वो सब शांति से बैठ कर पढ़ाई करते है।

कुछ देर बाद क्लास खत्म होने के बाद जब सभी बच्चे क्लास से भागते हुए क्लास से बाहर निकल रहे होते है तभी मुन्ना और उसके दोस्त एक बच्चे को अपने पास रोक लेते है।

मुन्ना:- राजन सुनो, हमे तुमसे कुछ बात करनी है।

राजन:- तुम्हे मुझसे क्या काम है।

दूसरा मित्र:- हम तुमसे दोस्ती करना चाहते हैं जिसके लिए हमने तुम्हारी मन पसंद लड्डू भी ले कर आये है।

राजन:- ऐसा है, तो ठीक है।

चारो एक दूसरे से हाथ मिलाते है और लड्डू खाते हुए स्कूल के दरवाजे पर पहुच जाते है, जहा एक बड़ी गाड़ी खड़ी होती है।

राजन:- अच्छा दोस्तों, मेरी गाड़ी आ गयी मैं चलता हूं। कल मिलेंगे।

ये बोल कर राजन अपनी गाड़ी में बैठ जाता है और चला जाता है।

जिसके बाद बाकी तीनो दोस्त एक दूसरे को देख कर हँसने लगते है।

पहला मित्र:- लगता है ये योजना जरूर काम करेगी।

मुन्ना:- अब इसे पता चलेगा की हमसे दुश्मनी करने का नतीजा क्या होता है।

इसके बाद वो सभी अपने अपने घर की तरफ बढ़ जाते है।

राजन अपने घर मे।

राजन:- मैंने आखिर इन सभी के साथ ऐसा क्या किया है की ये सभी मुझसे इतना न पसंद करते है। मुझे जमाल गोता खिला कर वो सब बहुत मजे ले रहे है, लेकिन मैं भी चुप नही बैठूंगा।

इसके बाद राजन सारा दिन वाशरूम में अंदर बाहर आता जाता रहता है और मुन्ना ओर उसके दोस्तों को कोसता रहता है।

अगले दिन सुबह जैसे है राजन स्कूल पहुचता है तो मुन्ना ओर उनके दोस्तों स्कूल की गेट पर ही उसका इंतेज़ार करते रहते दिखते है ,ये देख कर राजन जल्दी से गाड़ी से उतरता है और भागते भागते उन सभी के पास जा पहुचता है।

राजन:- तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया मैन तो तुम सभी को दिल से दोस्त बनाया था।

मुन्ना:- हमे किसी का दोस्त नही बनना खासकर एक झुटे का तो बिल्कुल नही।

मुन्ना ओर उसके दोस्त वह से क्लास की तरफ चले जाते है। उनके पीछे राजन भी क्लास की तरफ बढ़ता है। क्लास में सब अच्छे से पढ़ाई करते है।

छुट्टी की घंटी बजने के बाद जैसे है बच्चे बाहर जाने लगते है तो राजन, मुन्ना ओर उसके दोस्तों का रास्ता रोक लेता है।

राजन:- तुम सभी को पता है ना मेरे पिता कोन है फिर भी तुमने मेरे साथ ऐसा किया।

मुन्ना:- अच्छा तो अपने पुलिस वाले पिता से हमारी शिकायत करोगे , ठीक है जाओ कर दो शिकायत हम भी किसी से नही डरते।

पहला मित्र:- कही सच मे शिकायत न कर दे वरना इसके पिता का तो पता नही लेकिन मेरे पिता मेरी बहुत पीटाई करंगे।

दूसरा मित्र:- ये क्या बोल रहे हो मुन्ना, इसने अगर सच मे अपने पिता से हमारी शिकायत कर दी तो

पहला मित्र:- हाँ, मुन्ना सबकी बहूत पीटाई होगी हमे इससे माफी मांग लेनी चाहिए।

मुन्ना:- लेकिन इसने भी तोह मेरे साथ बहुत बुरा किया था तब तो किसी ने इससे माफी मांगने को नही कहा।

मुन्ना की बात सुन कर राजन एकदम हैतन रह जाता है।

राजन :- मैने क्या किया मुन्ना।

मुन्ना:- देखो जरा, नाटक तो ऐसे कर रह है जैसे इसे कुछ पता ही ना हो।

राजन:- हॉ, मुझे नही पता तुम ही बता दो मैन क्या किया है।

मुन्ना:- अच्छा तो सुनो उस दिन जब आधी छुट्टी के समय पूरी छुट्टी की घंटी बजी थी तो तुमने ही मास्टरजी को मेरी शिकायत की थी।

(राजन, मुन्ना ओर उसके दोस्त उस दिन के बारे में सोचते है। आखिर उस दिन हुआ क्या था।)

(उस दिन भूत काल मे

(मास्टरजी:- ये शरारत किसकी है, किसने किया है ये सब।

राजन:- मास्टरजी मुन्ना ने किया है, घंटी बजने के बाद जब मैंने बाहर जा कर देखा तो मुन्ना है घंटी के पास खड़ा था।

मुन्ना:- नही ये मैन नही किया।

मास्टरजी:- पहले तोह शैतानी करते ही फिर झूट भी बोलते ही तुम्हे सज़ा मिल के ही रहेगी चलो मेरे साथ।

मुन्ना :- (रोते हुए) नही मास्टरजी, मैने कुछ नही किया मुझे छोड़ दीजिए, मास्टरजी मैनै कोई शरारत नही की आप मेरी बात का यकीन करें मैंने कुछ नही किया।)

वर्तमान में

मुन्ना:- सिर्फ तुम्हारी वजह से मुझे उस शरारत की सज़ा मिली जो मैंने की है नही थी, किसी ने मेरा भरोसा नही किया, पिताजी ने भी मुझे बहुत डाटा ये सब सिर्फ तुम्हारी वजह से हुआ है।

मुन्ना की बात सुन कर राजन एक दम हक्का बक्का रह जाता है। वो हैरानी से मुन्ना की बात सुन रहा होता है और उसका जवाब देते हुए बोलता है।

राजन :- मुन्ना मेरा यकीन करो मैने वो सब जान बुच कर नही किया था।

मुन्ना:- इस बार की परीक्षा में मैं अव्वल आया हु इसलिए तुम मुझसे जलते हो तो मैं कैसे मान लू की तुमने ये सब जान बुच कर नही किया।

राजन:- घंटी बजने के बाद जैसे ही सब बाहर आये तब घंटी के पास मैने तुम्हे ही खड़ा देखा इसलिए मुझे लगा की वो सब तुमने ही किया है, और फिर मास्टरजी के पूछने पर मैैंने वही बोला जो देखा पर उसके बाद मुझे पता चला की वो शरारत तुमने नही की थी जिस पर मैं तुमसे माफी मांगने भी आया था पर तुम मुझेसे इतना ज्यादा गुस्सा थे की तुमने मेरी बात ही नही सुनी।

मुन्ना:- मुझे अभी भी तुमपे भरोसा नही है तुम बहुत बड़े झुटे हो।

राजन:- मैं झूट क्यों बोलूंगा, मैं मानता हूं ये मेरी गलती है और उसके लिए मैं तुमसे माफी भी मांगता हूं, मुझे माफ़ कर दो।

राजन की बात सुन और उसका चेहरा देख कर मुन्ना को उस पर भरोसा हो जाता है और वो उसे माफ कर देता है जिसके बाद वो सभी अच्छे दोस्त बन जाते हौ और हमेशा एक साथ रहने लगते है।

Moral:- हमे इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है की कभी बी पूरी सच्चाई जाने बिना किसी पर इल्जाम नही लगाना चाहिए।

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About Devashish Markam

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