मूर्ख व्यापारी। Murkh Vyapari। Cartoon Story in Hindi

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पड़ोस के गांव पर जाना माना व्यापारी हीरामल अपने परिवार के साथ मेले का आनंद उठाने कुशालपुर आया था।

(हीरामल की नजर पारखी थी और हीरे, सोने, चांदी के बारे में उसका ज्ञान अव्वल था। एक ही नजर में वह किसी भी धातु, पत्थर या हीरे का मूल्य पहचान जाता। हीरामल को अपने इस कुशलता पर बड़ा ही घमंड था।)

अचानक हीरामल की बीवी का ध्यान सर्कस के तंबू की ओर जाता है और वह कहती है ” चलिए बब्बू को सर्कस दिखाते हैं। “

पर हीरामल जाने से मना कर देता और कहता है ” आप और बब्बू देखिए मैं बाजार घूम कर आता हूं। “

सर्कस का नाम सुनते ही बब्बू खुशी से नाचने लगता है और उसकी मां भी उसे खुश देख वो भी खुश हो जाती है।

हीरामल टिकट निकालकर बीवी और बेटे को सर्कस के तंबू में बैठा है और खुद मेले में घूमने निकलता है।

घूमते घूमते हीरामल कांच के चीजों के ठेले पर पहुंचता है जहां काफी सारी कांच की वस्तुएं रखी जाती हैं खिलौने शीशे आकर्षक बर्तन और भी बहुत कुछ।

हीरामल की नजर एक के चमकते हुए कांच के टुकड़े पर जाती है जिसका आकार और चमक अलग ही है।

हीरामल मन ही मन सोचता है ” यह तो बड़ी अनोखी चीज दिख रही है। “

हीरामल उस ठेले के पास जाता है यह देख उस तंबू का दुकानदार हीरामल से कहता है ” क्या दिखाओ सेट खिलौने बर्तन या माला। “

हीरामल कहता है ” वह कांच का टुकड़ा दिखाना। “

हीरामल को उस चमकते कांच के टुकड़े को बारीकी से देखता है और समझ जाता है कि वह एक मूल्यवान हीरा है थोड़े तराशने की जरूरत है।

हीरामल अब उस दुकानदार से उस कांच के टुकड़े के बारे में थोड़ी बुराई करता है ताकि उसे लगे कि वह कांच का टुकड़ा कोई खास कांच का टुकड़ा नहीं और वह उसे बहुत ही कम दाम में दे दे।

हीरामल कहता है ” अरे भाई यह कैसे सामान्य चीजें रखी है बेचने के लिए कोई अनोखी वस्तु रखें। “

दुकानदार भी हीरामल की बातें ध्यान से सुनता है और कहता है ” जी सेठ जी अगली बार जरूर कोशिश करूंगा अभी आपको कुछ पसंद आया। “

हीरामल कहता है ” वैसे तो कुछ खास नहीं दिख रहा बस यह कांच का टुकड़ा ठीक लग रहा है बाकी तो कुछ काम की नहीं, कीमत क्या है इसकी? “

दुकानदार कहता है ” ज्यादा नहीं बस बीस रुपए “

हीरामल दुकानदार की बात सुनकर चौक जाता है और सोचता और मन ही मन सोचता है ” बड़ा मूर्ख है यह आदमी हीरे को मिट्टी के दाम में बेच रहा है मैं इससे और कम दाम में बात करके अपने पैसे बचा लेता हूं। “

हीरामल अपने पैसे बचाने के लिए दुकानदार से कहता है ” क्या भाई इस कांच के टुकड़े के ₹20 मांग रहे हो मैं इससे ज्यादा से ज्यादा ₹15 दूंगा “

दुकानदार सेट की बातों पर साफ इनकार करता है और कहता है ” क्या सिर्फ ₹15 नहीं नहीं सेठ लेना है तो 20 में ही लीजिए वरना जाने दीजिए। “

सेठ कहता है ” कोई मूर्ख ही इसे ₹20 में लेगा चलो जाने दो मैं चलता हूं। “

” यह जरूर मुझे वापस बुला लेगा मैं यहां से जाने का नाटक करता हूं “ ऐसा सोचकर हीरामल वहां से निकल जाता है, कुछ दूर आने के बाद वह फिर से मुड़ कर देखता है लेकिन दुकानदार अपने काम में व्यस्त दिखता है।

हीरामल सोचने लगता है ” थोड़ी देर बाद फिर से यहां चक्कर लगाता हूं यह मूर्ख जरूर ₹15 में वह हीरा बेचेगा “

हीरामल मेले में अन्य ठेले में घूमता है और कुछ ना कुछ खरीदता रहता कुछ देर बाद हीरामल अपनी बीवी और बेटी को लेने सर्कस के तंबू में जाता है और उन्हें तांगे में बैठता है।

हीरामल अपनी बीवी और बेटी को तांगे में बैठता है और फिर उस कांच के ठेले पर जाता है।

कांच के ठेले में बैठा दुकानदार सेट को दोबारा आता देखता है और बोलता है ” बोलिए सेठ “

इस बार हीरामल उस हीरे को खरीदने के लिए बेचैन होता है और वह बोलता है ” कुछ खास नहीं तुम्हारी दुकान में उस कांच के टुकड़े का सही मूल बोलो मैं खरीद लेता हूं “

दुकानदार कहता है ” जी सेठ मैंने बेच दिया थोड़ी देर पहले। “

दुकानदार की बात सुन कर हीरामल चौक जाता है और दुकानदार से कहता है ” क्या वो टुकड़ा तुमने बेच दिया, कितने में? “

दुकानदार कहता ” जी सेठ पूरे 25 रूप में मेरा तो दिन बनन गया। “

दुकानदार की बताई कीमत सुन कर हीरामल गुस्से से लाल हो गया और उससे कहा ” क्या सिर्फ 25 रूप, मूर्ख तुम्हे पता भी है उस कांच का टुकड़ा कितना खास था। कोई सामान्य कांच का टुकड़ा नहीं था वो। तुम्हे पता भी है कितना बड़ा नुकसान हुआ है। “

दुकानदार ये सुन उसे भी गुस्सा आता है वो सेठ से कहता ” सेठजी बुरा मत मानना लेकिन सबसे बड़े मूर्ख आप है, मै नहीं “

दुकानदार की बात सुन हीरामल फिर से आग बबूला हो जाता है।

सेठ दोबारा कहते हैं ” अच्छा, तुम्हें शायद पता नहीं मैं कौन हूं व्यापारी हूं हीरामल, 5 सोने चांदी की दुकान है मेरी पड़ोस के गांव में, सोने चांदी और हीरे की परख करने में मेरा हाथ कोई नहीं पकड़ पाता, नजरो से देख कर ही बता सकता हूं वस्तु का मूल्य, खुद मूर्खता की और मुझे मूर्ख कह रहा है उसके टुकड़े की कीमत क्या थी पता है। “

सेठ को इतने गुस्से में देख दुकानदार हैरान हो जाता है और कहता है ” क्या थी उस कांच के टुकड़े की कीमत “

सेठ ने कहा ” एक लाख का टुकड़ा था एक लाख का, और तुमने उसे मिट्टी के भाव में बेच दिया। तेरे जैसा मूर्ख इस दुनिया में कोई नहीं। “

सेठ की बात सुन के दुकानदार थोड़ा सोच में पड़ जाता है और फिर मुस्कुराते हुए कहते हैं ” सेठ जी माना कि मैं मूर्ख हूं लेकिन दुनिया के सबसे बड़े मूर्ख तो आप हैं महामूर्ख “

दुकानदार की बात सुन के हीरामल फिर से आग बबूला हो जाता है और गुस्से से कहता है ” क्या कहा, तुम्हारी इतनी हिम्मत मुझे महा मूर्ख कहते हो “

दुकानदार कहता है ” और नहीं तो क्या, मैंने तो वह टुकड़ा ₹25 में बेचा और कुछ तो मुनाफा कमाया, लेकिन जानते हुए भी ₹5 के मुनाफे के लिए आपने लाखो का हीरा हाथ से जाने दिया अब आप ही बताइए मूर्ख मै हूं या आप। “

दुकानदार की बात सुनते ही रामू को अपनी मूर्खता का एहसास होता है और वह निराश हो वहां से चुपचाप चला जाता है।

हीरमल मन मन ही मन सोचता है ” यह सही कह रहा है, हम पांच रुपए को बचाने की लालच में मैंने लाखों की चीज गवा दी आज उस दुकानदार ने मेरा घमंड तोड़ दिया। “

सुख:- कभी भी अपने ज्ञान और कुशलता पर गर्व नहीं करना चाहिए और किसी को कम आगरा भी गलत है जिस की सजा हमें मिलती है।

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About Devashish Markam

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