लखपति रिक्शेवाला। Lakhpati Rickshawala

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राजु एक पढ़ता लिखता गरीब नवजवान था। वो एक रिक्शा चला कर अपना गुजारा करता था।

राजु के माता पिता का बचपन में देहांत हो गया था। राजु के माता पिता के देहांत होने के बाद उसकी दादी ने ही उसे पाला था। पर कुछ समय बाद ही उसकी दादी का भी देहांत हो जाता है।

राजु अब अकेला था उसके पास अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। उसने कर्ज ले कर कॉलेज की फीस भारी।

वो बहुत मेहनत कर जैसे तैसे अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहता था।

दिनभर वो रिक्शा चलता और रात को पढ़ाई करता उसका अपना कोई नहीं था इसलिए जब भी मौका मिलता वो दूसरो की मदद कर दिया करता।

राजु की दादी ने उसे सिखाया था कि जैसे भी हो दूसरो कि मदद करनी चाहिए।

एक दिन राजु को एक बूढ़ी औरत मंदिर के बाहर बेहोश पड़ी मिलती है।

राजु बूढ़ी औरत के पास जा कर उठाने की कोशिश करता है पर बूढ़ी औरत होश में नहीं आती। राजु अपने आस पास मदद के लिए भी पुकारता है पर कोई भी उसकी बात नहीं सुनता।

राजु उस बूढ़ी मां को अपने रिक्शा में बैठा कर अस्पताल ले जाता है।

अगले दिन उसे एक बच्चा बाजार में रोता हुआ मिला। राजु उस बच्चे के पास जाता है।

राजु:- क्या हुआ बच्चे तुम क्यों रो रहे हो ?

बच्चा:- ( रोते हुए ) मेरी मां खो गई है।

राजु:- लगता है तुम खो गए हो, क्या तुम्हे अपने घर का रास्ता पता है, तुम कहा रहते हो, मै तुम्हे तुम्हारे घर ले चलता हूं।

राजु ने उस बच्चे को उसके घर पहुंचता है। बच्चे के माता पिता राजु का शुक्रिया करते है।

राजु अपने घर लौट रहा होता है उसे मोहन नाम का व्यक्ति सड़क किनारे रिक्शा का इंतजार कर रहा होता है। राजु ने उस अपनी रिक्शे में बैठाया।

मोहन बहुत परेशान लग रह था। राजु मोहन को परेशान देख कर राजु मोहन से सवाल करता है।

राजु:- भाई साहब, क्या हुआ आप परेशान दिख रहे हो, क्या कोई परेशानी ?

मोहन:- मै एक गरीब मजदूर हु, आज सुबह ही मैंने एक लॉटरी का टिकट खरीदा था पर अब वो मुझे नहीं चाहिए, मै लॉटरी के दफ्तर जा कर मै वो टिकट वापिस करना चाहता हूं।

राजु:- क्या वो टिकट वापिस ले लेंगे ?

मोहन:- पता नहीं, जा कर पूछना पड़ेगा।

राजु मोहन को लॉटरी के दफ्तर ले जाता है।

पर किसी ने भी मोहन का टिकट वापिस नहीं लिया। मोहन उदास हो कर वापिस लौटता है।

राजु:- क्या उन्होंने टिकट लिया ?

मोहन:- नहीं, मुझसे बड़ी भूल हो गई, अब अगर मै पैसे ले कर घर वापिस नहीं गया तो हम आज खाना नहीं खा पाएंगे। लगता है आज भूखा ही सोना पड़ेगा।

राजु:- तुम्हारा ये टिकट कितने रुपए का है।

मोहन:- 200 रुपए।

राजु:- अब कुछ नहीं हो सकता तुम्हे सोच समझ कर टिकट खरीदना चाहिए था।

मोहन:- तुम ठीक कह रहे हो, पर मै ऐसे उम्मीद नहीं छोड़ सकता। मुझे कुछ तो करना होगा, काश कोई मुझसे ये टिकट खरीद ले।

मोहन राजु ती तरफ देखता है।

मोहन:- तुम खरीद लो ये टिकट देखो इस पर 50 लाख रूपए का इनाम है। ज्यादातर जरूरत मंदो का निकलता है।

राजु:- मै, मै नहीं, नहीं, मै लॉटरी पर विश्वास नहीं रखता।

मोहन:- एक बार ले कर तो देखो शायद कभी दुबारा लेना ना पड़े। इसी बार तुम्हारी लॉटरी लग जाए, ले लो, मेरी मदद करो।

राजु:- मै तुम्हारी मदद क्या करू, मै नहीं कर पाऊंगा।

मोहन:- तुम चाहो तो मेरी मदद कर सकते हो सिर्फ 200 रुपए की बात है, ले लो। ये टिकट तुम 150 रुपए में ले लो, अच्छा तुम्हारे पास कितने रुपए है ?

राजु:- मेरे पास सिर्फ 100 रुपए है।

मोहन:- अच्छा ठीक है। तुम मुझसे ये टिकट सिर्फ 100 रुपए में ले लो।

राजु:- ठीक है, मै ये टिकट तुमसे खरीद लेता हूं।

राजु मोहन की मदद करता है और राजु मोहन से 100 रुपए में लॉटरी की टिकट खरीद लेता है।

घर पहुंच कर राजु ने टिकट को देखा।

राजु:- मैंने कभी लॉटरी पर कभी भी विश्वाश नहीं किया, ना कभी खरीदा फिर भी आज मेरे पास एक लॉटरी का टिकट है।

अगले दिन राजु रिक्शा स्टैंड पर अपना रिक्शा लिए खड़ा था।

मोहन भागता हुआ उसके पास आया।

मोहन:- राजु तुम्हे विश्वाश नहीं होगा मेरी बात सुन कर।

राजु:- क्या हुआ ?

मोहन:- तुम्हारी लॉटरी लग गई।

रिक्शा स्टैंड पर खड़े सभी लोग हैरान रह गए।

राजु की लॉटरी लगी थी अब तो राजु भी हैरान था, उसे 50 लाख रुपए की लॉटरी लगी थी वो अपने अच्छे कर्मो की वजह से अमीर हो गया था।

राजु ने अपनी पढ़ाई पूरी कि और अच्छे कर्म करना और दूसरो की मदद करना नहीं छोड़ा।

उसका विश्वास इस बात पर पक्का हो गया कि यदि आपकी किस्मत में हो तो वो चीज आपको जरूर मिलती है।

सीख:- जिसकी क़िस्मत में हो उसी की लॉटरी लगती है, किस्मत से ज्यादा और किस्मत से कम कभी नहीं मिलता।

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About Devashish Markam

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