जादुई घर। Jadui Ghar। Fairy Tale Story in Hindi

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चिंटू और पिंटू नाम के दो दोस्त थे चंदू बहुत ही मेहनती और ईमानदार था पर पिंटू आलसी और कामचोर था।

चंदू काम की तलाश में रहता, लेकिन उसके हाथ कभी कोई काम नहीं लगता।

ऐसे ही एक दिन वह अपने घर में सो रहा था अचानक उसे उसके कमरे की खिड़की के बाहर बिजली चमकी। चंदू घबराकर उठ गया उसने देखा कि खिड़की के पास एक परी हवा में उड़ रही है।

यह देख चंदू चौक गया। चंदू अपने बिस्तर से उठ खड़ा हुआ और उस परी के पास गया। परी चंदू के घर के अंदर आई।

परी चंदू को एक तस्वीर देते हैं और चंदू से कहती है ” चंदू यह एक जादुई घर की तस्वीर है इस घर में बहुत सारे हीरे जवाहरात है जो तुम्हें मिल जाएंगे, लेकिन घने जंगल में छुपे इस घर को तुम्हें खुद ही ढूंढना होगा और याद रहे अगर तुमने लालच करके कुछ मांगा तो तुम हमेशा के लिए उस घर में कैद हो जाओगे। “

दूसरे दिन चंदू ने अपने दोस्त पिंटू को यह सारी कहानी बताई। उस तस्वीर को अपने साथ लेकर वह दोनों जादुई घर की तलाश में निकल पड़े।

जंगल में उस जादुई घर को ढूंढते ढूंढते हैं वह काफी दूर तक निकल पहुंचने पर आखिर में उन दोनों को जादुई घर मिल ही गया।

जादुई घर मिलने के बाद चंदू पिंटू से कहता ” तुम यहीं रुको मैं अंदर जा कर देखता हूं कि अंदर क्या है। “

पिंटू को अपने दोस्त चंदू पर भरोसा नहीं था उसे लगा कि चंदू अकेले ही सब धन लेना चाहता है और पिंटू चंदू से कहता है ” रुक जाओ चंदू मैं भी तुम्हारे साथ आता हूं। “

चंदू अब पिंटू को मना भी नहीं कर सकता था। चंदू पिंटू को अपने साथ ले चलने के लिए राजी हो जाता है और वह दोनों एक साथ घर के अंदर जाते हैं।

चंदू पिंटू को दुबारा से याद दिलाते हुए कहता ” याद है ना परी ने क्या कहा था, अगर लालच में आकर अपना हिस्सा लोगे तो हमेशा के लिए उस घर में कैद हो जाओगे इसलिए जरा सोच समझ के बर्ताव करना।

वह दोनों जादुई घर के अंदर जाते हैं। जैसे ही वह घर के अंदर जाते हैं घर का दरवाजा अंदर से अपने आप बंद हो जाता है। वो दोनों देखते हैं कि उस घर में बहुत सारे सोने चंदू हीरे रखे हुए है।

परी के कहे अनुसार चंदू अपनी जरूरत के हिसाब से धन ले लेता है। वह पिंटू को भी अपना हिस्सा देने की गुजारिश करता है लेकिन इतने सारे हीरे जवाहरात देखकर पिंटू अपना लालच रोक नहीं पाता।

अब पिंटू के मन में लालच जाग जाता है और चंदू से कहता है ” चंदू तुम एक काम करो तुम अपना हिस्सा लेकर बाहर जाओ मैं तुम्हारे पीछे ही आता हूं। “

चंदू एक बार फिर से बिट्टू को याद दिलाता है ” देखो पिंटू मैं तुम्हें फिर एक बार कहता हूं जितना जरूरी है बस उतना ही लेना लालच की तो पछताओगे। “

पिंटू चंदू से कहता ” हां हां, तुम फिकर मत करो मैं सब देख लूंगा तुम बाहर जाकर बस मेरा इंतजार करो मैं अभी आया। “

जैसे ही चंदू बाहर आया पिंटू पर उसका लालच हावी हो गया। वो उस घर में पड़ा सारा सोना हीरे जवाहरात एक साथ इकट्ठा करने लगा।

तभी अचानक उस घर में एक तेज रोशनी चमकती उस घर का दरवाजा अंदर से ही बंद हो गया।

सारा सोना हीरा जवाहरात एकदम से गायब होने लगे और उन्हीं के साथ घर भी। चंदू बाहर खड़ा यह सब नजारा देख रहा था और उस घर के साथ-साथ अपने दोस्त को भी गायब हुआ देखो चंदू बड़ा ही निराश हो गया।

वह जादुई घर और पिंटू उस जगह कभी वापस नहीं आए।

सीख:- हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए।

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About Devashish Markam

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