घमंडी करतब वाला। Ghamandi Kartab Wala। Cartoon Story in Hindi

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सारंगपुर के सीहोर जिले में सिर्फ दो ही चीजें मशहूर थी। एक वहां उगने वाले मक्का और दूसरा रघु करतब वाला।

रघु पहले एक चाबी वाला था जो लोगों के तालो की चाबियां बनाता था लेकिन चाबियां बनाते बनाते रघु ने ऐसी महारत हासिल कर ली कि वह सिर्फ एक पेन से कोई भी ताला खोल सकता था।

अब उसे गांव-गांव में बुलाया जाता था बिना चाबी के ताला खोलने का खेल दिखाने के लिए वह दिन-ब-दिन मशहूर होता जा रहा था।

धीरे-धीरे रघु का घमंड बढ़ता जा रहा था।

राजा का एक लाडला बेटा था उसका नाम राजकुमार था वह अपनी युक्ति से शतरंज का खेल जीते ही जा रहा था। राजकुमार ने रघु करतब वाले का नाम बहुत सुना था और उसे उसके कारनामे के बारे में भी पता था।

एक दिन रघु करतब वाला राजा के दरबार पहुंचा। राजा के दरबार पहुंचते ही रघु करतब वाला बहुत डिंगे मारने लगा।

रघु दरबार पहुंचते ही कहने लगा ” प्रणाम महाराज, मजबूर हूं ऐसा कोई ताला नहीं जो मैं खोल ना सकू। या ऐसा केह लीजिए कि ऐसा कोई ताला बना ही नहीं जिसे मै खोल ना सकू। चाहे मुझे आस्मा लीजिए। “

राजा ने रघु की बातों को ध्यान से सुना और कहां ” तुम्हारी परीक्षा हमारे युवराज लेंगे “

ये सुन रघु खुश हो कर बोला ” आप चाहे जैसा भी ताला बना लीजिए मै उसे खोल दूंगा चाहे मुझे अलमारी में बंद कर के नदी में फेक दीजिए मै उसे भी खोल लूंगा। “

ये सुन युवराज को रघु के घमंड को तोड़ने का तरीका मिल गया था। उन्होंने रघु को एक बार फिर पूछा ” क्या तुम्हे यकीन है ? “

रघु अब पीछे हटने वाला नहीं था। उसने भी के दिया ” जी युवराज “

इस बात पैर युवराज ने भी शर्त रख दी ” अगर तुम जीते तो हम तुम्हे 1000 सोने के सिक्के इनाम में देंगे लेकिन अगर तुम हार गए तो तुम अपना करतब कभी नहीं दिखाओगे। क्या तुम्हे मंजूर है ? “

रघु का आत्मविश्वास इतना बढ़ चुका था कि अब वो पीछे हटने को तैयार ही नहीं था। उसने दुबारा से कहा ” जी युवराज “

युवराज, रघु से कहते है ” तो फिर कल सबेरे तालाब पर आ जाना। “

अगले दिन तालाब पर बहुत सारी भीड़ इकट्ठा हो गई। महाराज के साथ युवराज आए, रघु भी आया।

अब युवराज रखो को चुनौती देने के लिए तैयार थे उन्होंने कहा ” परीक्षा बहुत आसान है इस अलमारी में तुम्हें बंद किया जाएगा। अलमारी को तालाब में डाल दिया जाएगा तुम्हें सिर्फ अपना कमाल दिखा कर अलमारी से बाहर आकर तालाब की सतह पर आ जाना है। “

शिवराज ने रघु की सुरक्षा के लिए यह भी कहा कि ” अगर तुम ताला खोल ना पाओ और तुमने अपनी हार मान ली हो तू अपने हाथों के कड़े से अलमारी को ठोकना तुरंत अलमारी को बाहर खींच ली जाएगी। “

रघु को अपने ताला खोलने के कर्तव्य पर इतना घमंड था कि उसने भी बड़े शान से के दिया ” इसकी जरूरत ही नहीं पड़ेगी मैं तैयार हूं “

रघु अलमारी के अंदर गया और सैनिकों ने अलमारी को तालाब के अंदर डालना शुरू किया।

जैसे ही अलमारी पानी मैं जाने लगी रघु ने अपनी जेब से एक पर्स निकाला और वह अलमारी खोलें कोशिश करने लगा।

उसने पिन को आडा तेडा मोड़ा लेकिन अलमारी का दरवाजा खुल ही नहीं रहा था। इतना कोशिश करने के बावजूद भी रघु से दरवाजा खुल ही नहीं रहा था।

गांव के सभी लोग रघु का इंतेज़ार कर रहे थे।

आखिर कार थक हार के रघु ने अपने कड़े से अलमारी का दरवाजा बजाय। तुरंत ही सैनिकों ने अलमारी खींच ली।

रघु के पानी से निकलने के बाद युवराज ने है रघु को कहां ” क्यों क्या हुआ रघु, तुम तो इतने डींगे हाक रहे थे, कहा गया तुम्हारा हुनर। तुमने अपने आप पर घमंड था क्या हुआ, सारा घमंड टूट गया। “

रघु का सर शर्म से झुक गया ” आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं कोई ताला खोल नहीं पाया, ये पहली बार है। ” रघु ने कहा।

राजा युवराज हस्ते हुए रघु से कहते है ” वो इसलिए क्यू की इस अलमारी में ताला था ही नहीं। “

रघु को अब भी समझ नहीं आता। रघु ने झट से सवाल किया ” क्या मतलब ? “

युवराज ने जवाब दिया ” मैं चाहता था कि तुम किसी भी ताले को खोल सकते हो इसीलिए मैंने इस अलमारी में ताला लगाया ही नहीं। “

युवराज ने उस अलमारी को खोलने का हल भी बताएं ” इस अलमारी का दरवाजा खोलने के लिए सिर्फ ताकत लगानी थी क्योंकि वह बहुत अच्छे से बंद किया गया था। “

युवराज ने यह भी बताया कि रघु वो ताला क्यों नहीं खोल पाया उन्होंने कहा ” तुम अपने घमंड के कारण तुम्हें दरवाजे को खोलने का सोचा ही नहीं तुम सिर्फ इसके ताले को खोलने की कोशिश कर रहे थे। “

युवराज ने ये सब करने की वजह बताई ” मैंने यह सब तुम्हें हर आने या अपनी जीत के लिए नहीं किया, बल्कि तुम्हारी घमंड को तोड़ने के लिए किया था। “

अंत में राजा युवराज ने रघु की तारीफ करते हुए कहा कि ” तुम्हारा हॉरर अप्रतिम है पर तुम घमंडी बनते जा रहे हो यह गलत था “

युवराज की बात सुनकर रघु को एहसास होता है कि उसने बहुत ही गलत किया। रघु अपने किए पर शर्मिंदा होता है। रघु राजा, युवराज और गांव के सभी लोग से माफी मांगता है।

सीख:- घमंड से सिर्फ हमारा नुकसान ही होता है।

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About Devashish Markam

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