गरीब की दुआ। Garib ki Duaa। Short Moral Story in Hindi

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सारंगपुर नाम का एक गांव में एक लड़का रहता था उसका नाम कुमार था।

सारंगपुर में रहने वाला कुमार अब कॉलेज जाने लगा। कुमार पढ़ाई-लिखाई में आज था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी उसकी वजह से उसके माता, पिता चिंतित रहते थे और वह आदत थी कि किसी को भी बेवजह परेशान करना और उसका आनंद उठाना।

कुमार के माता-पिता बार बार उसे अपनी आदत सुधारने को कहते पर कुमार रोज या कह कर टाल देता कि जब वह बड़ा हो जाएगा तब वह अपनी आदत सुधार लेगा।

एक दिन कुमार के नानाजी कुमार से मिलने आते हैं। नानाजी कुमार को बचपन से ही जानते थे उसकी आदतों से भी वाकिफ थे पर उन्हें पता था कि कुमार एक दिन जरूर सुधर जाएगा।

एक दिन कुमार और उसके नानाजी मंदिर जाते है मंदिर पहुंचते ही वह देखते हैं कि मंदिर बिल्कुल खाली है बाहर सीढ़ियां के पास जूतों की एक जोड़ी है शायद कोई एक आदमी अंदर गया है।

कुमार को मस्ती करने की इच्छा होती है।

कुमार नानाजी से कहते हैं ” नानाजी अगर हम यह जूते कहीं छुपा दे तो कितना मजा आएगा “

नाना जी कहते हैं ” लेकिन क्यों बेटा इससे तुम्हें क्या फायदा? “

कुमार कहता है ” आनंद नानाजी आनंद, सोचिए नाना जी जब वह आदमी उसके जूते के लिए परेशान हो जाएगा तो हमें कितना मजा आएगा। “

नाना जी समझ जाते हैं कि यही सही मौका है कुमार को अच्छा सीख देने का और वह कहते हैं ” कुमार आज कुछ अलग करते हैं और देखते हैं क्या होता है “

नानाजी कुमार को ₹10 के 6 सिक्के देते हैं और उस आदमी के हर जूते में 3-3 सिक्के रखने के लिए कहते है।

कुमार नाना जी से कहता है ” नाना जी इससे तो आपका नुकसान हो जाएगा “

नाना जी प्यार से कहते हैं ” देखते हैं हो सकते हैं फायदा भी हो “

नाना जी और कुमार थोड़ी दूर सीढ़ियों पर बैठकर उस आदमी का इंतजार करते हैं।

थोड़ी देर में वह आदमी बाहर आता है उसकी हालत काफी खराब दिख रही होती है।

कुमार कहता है ” यह आदमी बहुत भूखा प्यास लग रहा है नाना जी शायद मुसीबत में है। “

गरीब आदमी बाहर आकर अपने जूते पहनने लगता है तभी उसी जूतों के अंदर सिक्कों का एहसास होता है। वह सिक्के निकलता है और देखता है उसकी जूतों में 3 सिक्के निकलते हैं वह आदमी सोचने लगता है ” यह क्या ₹10 के 3 सिक्के यह कहां से आए यहां तो कोई नहीं दिख रहा “

फिर वह दूसरे जूते में पैर डालता है फिर उसे ₹10 की और 3 सिक्के मिलते हैं आदमी खुशी से रोने लगता है और भगवान को धन्यवाद देता है।

आदमी खुशी खुशी वहां से निकल जाता है नानाजी कुमार की ओर देखते हैं और कुमार की आंखें भर आती हैं।

तानाजी कुमार से पूछते हैं ” क्यों कुमार अब बताओ तुम अगर उस गरीब आदमी के जूते छुपाते तो तुम्हें ज्यादा खुशी मिलती या अब उस गरीब आदमी की मदद करके ज्यादा खुशी मिली। “

कुमार कहता है ” मैं समझ गया नाना जी आप क्या कहना चाहते हैं अब ऐसी गलती कभी नहीं करूंगा। “

सीख:- हमें हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए हमारा मजा किसी को महंगा भी पड़ सकता है लेकिन हमारी छोटी सी मदद किसी के जीवन में बड़ी खुशी भी ला सकती है।

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About Devashish Markam

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