फूटा घड़ा। Futa Ghada। Panchtantra Story in Hindi

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एक गांव में श्याम नाम का किसान था। उसका एक छोटा सा खेत था उसके पास दो मिट्टी के घड़े थे जिसे वह रोज अपने घर के लिए पानी लेकर आता था।

लेकिन उनमें से एक घड़ा फूट चुका था। जिसके वजह से एक घड़ा भरा हुआ रहता था और दूसरा घड़ा आधा भरा हुआ होता था।

फूटा हुआ घड़ा बहुत शर्मिंदा रहता था क्योंकि वह आधा पानी ही घर पहुंचा पाता।

नया और सही घड़ा को इस बात का बहुत घमंड था वह पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाथा इसलिए वह फोटो घड़ी को कहता है ” तुम आधा पानी ला कर मरने का मेहनत बेकार कर देते हो। “

यह सुनकर फोटो घड़ी को बहुत बुरा लगता है। दोनों घरों की बातें सुनकर श्याम होते गए को कहता है ” तुम सिर्फ अपनी बुराई देख रहे हो और मैं तुम्हारी छिपी हुई अच्छाई भी देख रहा हूं इसलिए मुझे कभी तुम पर कभी दिखाई नहीं दी। “

फूटा घड़ा सोच में पड़ जाता है और हो श्याम से पूछता है ” पर वह कैसे ? “

श्याम कहता ” हर रोज हम जब नदी से वापस आते हैं तो तुम्हारा आधा पानी जमीन पर गिर जाते हैं जिससे वहां फूलों को खोजने में मदद मिलती है तो तुम कैसे कह सकते हो कि तुम किसी काम के नहीं। “

फूटा घड़ा सोच में पड़ जाता है और दोबारा श्याम से पूछता है ” इन सब में आपकी मदद कैसे हुई ? “

श्याम ने जवाब दिया ” अब मैं खेती के साथ साथ उन फूलों को भी बेचने लगा हूं जिससे मेरे पास और अधिक धन आ जाता, उस धन से में खेत के लिए ज्यादा और अच्छे बीज खरीद लेता हूं। ये सब तुम्हारी वजह से हुआ “

सीख:- हमें कभी भी किसी के हुनर का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए बल्कि उसकी अच्छाई को ढूंढ कर उसे और निखारना चाहिए।

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About Devashish Markam

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