दो बगुले और कछुआ। Do Bagule aur Kachua। Panchtantra Story in Hindi

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कई साल पहले एक जंगल में एक छोटी सी झील थी।

उस झील में एक कछुआ रहा करता था। उस झील के किनारे 2 बगुले भी रहा करते थे।

बगुले और कछुआ अच्छे दोस्त बन गए थे और साथ में खेला करते थे।

कछुआ का ये मानना था कि वो बहुत चालाक है। उसने अपने चतुराई से बंसी बनाई और उस बंसी से मछलियां पकड़ कर वो बगुले को दिया करता था। कछुए के दिए हुए मछलियों को खा कर बगुले बहुत खुश होते थे।

एक बार जंगल में भयानक सूखा पड़ा। सारे पेड़ सुख गए थे। नहर में भी एक बूंद पानी नहीं बचा था।

खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा था इसलिए उन तीनों दोस्तो को भूखा रहना पड़ रहा था।

पहला बगुला:- दोस्त, सारे पेड़ सुख गए है और नहर में तो पानी ही नहीं। खाने को मछलियां भी नहीं, हमे नजदीक ही एक झील ढूंढ़ लेना चाहिए।

दूसरा बगुला:- हा ये सच कह रहे हो, बाकी सारे जानवर भी तो यहां से चले गए है। खाने के बगैर हम कैसे जाएंगे, अगर हम दूसरी जगह नहीं ढूंढेंगे तो हम भी मर जाएंगे इसलिए कल हम दोनों यहां से चले जाएंगे।

दोनो बगुले कि बातें कछुआ सुन लेता है।

कछुआ:- मेरे दोस्त हम तीनों यहां कितनी अच्छी तरह से रहते, क्या तुम मुझे यही छोड़ कर चले जाओगे ? मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।

पहला बगुला:- माफ करना मेरे दोस्त, हम भी तुम्हे साथ ले जाना चाहते है पर कैसे ले जाए। हम तुम्हे अपनी पीठ पर बिठा कर ले जाए तो हो सकता है तुम गिर जाओ।

दूसरा बगुला:- हा, और अगर हम तुम्हे पांव से पकड़ कर ले जाने की सोचे तब भी तुम्हारी शरीर इतनी बड़ी है कि हम तुम्हे पांव से नहीं पकड़ सकते। तुम ही बताओ हम क्या करे ?

कछुआ:- आप दोनो मेरे बारे में इतना सोचते है। धन्यवाद, तुम तो जानते ही हो मै कितना बुद्धिमान हूं इसलिए मैंने एक तरकीब सोची है।

बगुले:- तुम सच कहते हो, तुम हम दोनों से ज्यादा बुद्धिमान हो। क्या सोचा है बताओ ?

कछुआ:- तुम दोनों जा कर कहीं से मोटी सी, लंबी सी, तगड़ी सी, एक लकड़ी ले आओ मै उस लकड़ी को अपने दांतों से पकड़ लेता हूं, तुम दोनों उस लकड़ी को दोनो तरफ से अपने मुंह में पकड़ कर उड़ जाना इस तरह हम तीनो एक साथ जा सकेंगे।

कछुए की बातें सुन कर दोनो बगुले दंग रह गए और वो दोनो जा कर एक लम्बी सी, मोटी सी, तगड़ी सी लकड़ी ले आए।

कछुए ने उस लकड़ी को अपने जबड़ों से जोर से पकड़ लिया और फिर तीनों एक साथ उड़ के उस जंगल से बाहर निकाल गए।

इस तरह उड़ते हुए एक गांव से गुजर रहे थे तो नीचे खेल रहे बच्चे उन तीनों को देख के तालियां बजाने लगे और खुश होने लगे उनमें से एक बच्चे ने जोर से चिल्लाते हुए कहा ” देखो देखो वो बगुले कितने बुद्धिमान है, उस कछुए को कितनी आसानी से उस लकड़ी में लटका के ले जा रहे है, शायद इंसान से भी बुद्धिमान है। “

बच्चे की बातें सुन कर कछुए को गुस्सा आने लगा और बगुलों भी चुपचाप उनकी बातें सुन रहे थे ये देख कछुए का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया।

कछुए ने मुंह खोल के कहा ” ये तरकीब तो मैंने बताई है। “

बेचारा कछुआ ये कहने के लिए मुंह खोलता है और मुंह खोलते ही कछुआ ऊपर से गिर गया और गिर कर मर गया। ये देख दोनो बगुले बहुत दुखी हुए, दोनो बगुले कुछ कर भी नहीं सकते थे इसलिए वो वहा से उड़ते हुए चले गए।

शिक्षा:- ” हम कोई भी काम करे, हमे बहुत सोच समझ कर करना चाहिए, वरना हमारी हालत भी कछुए की तरह हो सकती है। “

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About Devashish Markam

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