धोबी वाला बाबू। Dhobi wala Babu Kids Story in Hindi

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कई साल पहले सोलापुर नाम के एक गांव में जगदीश नाम का एक धोबी रहा करता था।

जगदीश रोज धोबी घाट जा कर कपड़े धो कर उन्हें अच्छे से स्त्री कर ग्राहकों को अच्छी सेवाएं दिया करता था।

जगदीश अच्छा इंसान के साथ मेहनती और ईमानदार भी था।

जगदीश का एक बेटा था उसका नाम राहुल था। वो बहुत ही लालची था और कई बार जगदीश से झूठ भी बोला करता था।

राहुल हमेशा नए कपड़ों की ख्वाहिश करता था। राहुल अपने दोस्तो को नए कपड़े में देख उसे ईर्षा होने लगती थी।

एक दिन राहुल अपने पिताजी की स्त्री के लिए रखे गए कपड़ों में से एक जीन्स पैंट उठा ले गया।

हर दिन की तरह जब कपड़े लौटने जगदीश ग्राहक के घर पहुंचा।

” जगदीश मैंने तुम्हे 4 पैंट, 5 शर्ट दिए थे लेकिन इसमें 3 पैंट है ” ग्राहक कहता है।

” लगता है मैंने गिनने में गलती कर दी, मै घर जा कर देखता हूं। ” जगदीश कहता है।

जगदीश घर पर ग्राहक के पैंट ढूंढता है पर कहीं नहीं मिलता, इतने में राहुल घर पहुंचता है।

जगदीश राहुल से पूछता है इस ” बेटा तुमने 102 फ्लैट में रहने वाले मिश्रा जी की पैंट देखी क्या ? “

” यही कही होगा या किसी दूसरे ग्राहक के पास गलती से चला गया होगा ” जगदीश कहता है।

ऐसे ही सप्ताह में कभी शर्ट तो कभी पैंट तो कभी ब्लेजर गायब होने लगे। जगदीश को समझ नहीं आया आखिर कपड़े घर से गायब कैसे हो रहे है।

एक बार एक पुलिस इंस्पेक्टर ने जगदीश को बुलाया और उसके व्यापार के बारे में पूछा।

” ठीक है साहब, पर लगता है सप्ताह में कभी कभी कपड़े चोरी हो रहे है, इतना सोचने पर भी समझ नहीं आ रहा ” जगदीश ने भी जवाब दिया।

” ध्यान से मेरे कपड़ों के साथ ऐसा ना हो “ इंस्पेक्टर ने कहा।

हर बार की तरह जगदीश पुलिस की वर्दी को धो कर स्त्री कर अलग से रख कर जगदीश कुछ काम के लिए बाहर जाता है।

राहुल, जगदीश की गैरमौजूदगी का फायदा उठा कर राहुल पुलिस की वर्दी पहन लेता है और सड़कों पर घूमने लगता है।

राहुल को पुलिस की वर्दी में देख हर कोई उसे सलाम करने लगे, आदर से बात करने लगे।

राहुल ने सोचा ” मैंने आज सिर्फ एक दिन के लिए पुलिस की वर्दी पहन रखी है तो लोग मुझे कितना आदर सम्मान देने लगे, अगर मै ये वर्दी रोज पहनु तो मुझे रोज आदर और सम्मान मिलेगा। “

दूसरी तरफ घर में जगदीश पुलिस की वर्दी ढूंढने लगा, ढूंढने पर भी वर्दी ना मिलने पर जगदीश तुरंत ही पुलिस इंस्पेक्टर के पास गया।

पुलिस इंस्पेक्टर ने अपने सहयोगियों से फोन में बात कर कपड़े चोर को ढूंढ़ कर पकड़ने को कहा।

राहुल को इस बात का पता नहीं था कि पुलिस उसे ढूंढ़ रही है।वो बड़े ही मजे में बाजार घूम रहा था।

एक कांस्टेबल ने राहुल को पुलिस कि वर्दी में देख कर उसके पास जाता है और सलाम करता है।

बातो ही बातो में कांस्टेबल राहुल से पूछ पड़ता है ” आप कौनसे स्टेशन से हो ? “

राहुल सोचने लगता है ” मै कांस्टेबल से क्या कहूं मुझे तो पुलिस कि नौकरी के बारे में कुछ भी नहीं पता। “

कांस्टेबल राहुल को इतनी देर तक सोचता और घबराया देख उसे शक होने लगा। इतने में कांस्टेबल को उसके फोन पर कॉल आता है।

कांस्टेबल को फोन पर बात कर रहा होता है उसे कॉल पर पता चलता है कि एक लड़का पुलिस कि वर्दी पहन कर सड़कों पर घूम रहा है।

कांस्टेबल राहुल को तुरंत ही गिरफ्तार कर लेता है और उसे जेल में डाल देता है।

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About Devashish Markam

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