चालक खरगोश और शेर। Chalak Khargosh aur Sher। Panchtantra Story in Hindi

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एक बड़ी सी जंगल में बब्बर शेर रहा करता था। बब्बर शेर उस जंगल का राजा था।

उसे जब भी भूक लगती थी वो जंगल जा कर बाकी जानवरों का शिकार करता था।

कभी कभार भूख ना लगने पर भी अपनी शौख के लिए शिकार करता था।

उसके हरकतों से बाकी सारे जानवर डरे हुए थे।

एक दिन जंगल के सारे जानवरों ने मिल कर एक बैठक कि।

बंदर:- अगर ऐसा ही चलता रहा तो जंगल के सारे जानवर शेर का शिकार बन जाएंगे। हमे इस बब्बर शेर से छुटकारा पाने के लिए तरकीब सोचनी होगी।

तरकीब सोचने के बाद जंगल के सारे जानवर मिल कर शेर की गुफा में शेर से मिलने गए।

लोमड़ी:- राजा जी आपको नमस्कार, हम सारे जानवर आपसे कुछ पूछने आए है।

शेर:- क्या पूछना चाहते हो जलदी पूछो।

हाथी:- राजा शेर, हम सारे जानवरों ने मिल कर एक प्रस्ताव रखा है। आगे से आपको शिकार करने की जरूरत नहीं है। हर रोज हम में से एक जानवर आपका शिकार बनने खुद ही आ जाया करेंगे।

शेर:- ठीक है, पर तुम्हारी बात मानने से पहले मेरी भी कुछ शर्त है।

सारे जानवर शर्त क्या हो सकता है ये सोचने लगे।

शेर:- जानवर चाहे कोई भी हो पर सुबह सुबह आना होगा देर होने से मुझे गुस्सा आ जाएगा और अगर जानवर छोटे हुए तो कमसे कम चार आने चाहिए। अगर मेरी बात नहीं मानोगे तो मै तुम सबका शिकार करूंगा।

सारे जानवरों ने बब्बर शेर की बात मानी और वहा से चले गए इस तरह हर रोज एक जानवर बब्बर शेर का शिकार बनने आ जाया करते थे।

एक दिन एक खरगोश की बारी आती है। वो बड़ा ही चालक खरगोश था उसने सोचा ” क्या किया जाए इस शेर से कैसे छुटकारा पाया जाए। “ ये सोचते हुए खरगोश जंगल में चलने लगा।

शेर की गुफा की तरफ जाते हुए उस खरगोश को एक पुराना कुआ दिखाई पड़ता है।

खरगोश ने उस कुएं में झाक कर देखता है। कुएं के पानी मै खरगोश को उसकी परछाई दिखाई देने लगती है।

दूसरी तरफ शेर खरगोश के इंतजार में था। शेर को बहुत गुस्सा आ रहा था, पर खरगोश आराम से चलता जंगल में घूमता घूमता मजे ले कर गुफा की तरफ धीरे धीरे बढ़ रहा था।

शेर को बहुत ही भूख लग रही थी और शेर भूख से दहाड़ रहा था।

कुछ देर बाद खरगोश, शेर की गुफा के पास पहुंचा।

शेर खरगोश को आता देख शेर गुस्से में जोर से दहाड़।

शेर:- इतनी देर क्यों हुई, और सिर्फ एक खरगोश, सिर्फ एक खरगोश से मेरा क्या होगा। बाकी के खरगोश कहा है ?

खरगोश को एक तरकीब सूझी और शेर के सामने नाटक करने लगा।

खरगोश:- माफ कीजिए बब्बर शेर जी हम चार खरगोश आपके लिए ही निकले थे, पर बीच में वो…

शेर:- क्या वो बताओगे भी क्या हुआ था बीच में ?

खरगोश:- बब्बर शेर जी हम चार खरगोश आपके पास आने के लिए निकले थे, पर बीच में एक बड़ा सा शेर आपसे भी बड़ा था उसने बाकी के तीनों खरगोश को खा लिया मै तो आपका आहार बनने के लिए अपनी जान बचा कर भाग आया।

तब शेर ने बड़े गुस्से मै कहा।

शेर:- क्या बोला, मेरे से भी बड़ा शेर, मेरे ही जंगल में। चलो मेरे साथ कहा है, मुझे दिखाओ मै अभी उस शेर का शिकार करूंगा।

तब चालक खरगोश शेर को उस कुएं के पास ले आया।

खरगोश:- बब्बर शेर जी मैंने जिस शेर के बारे में बताया वो इस कुएं के अंदर है।

शेर ने खरगोश की बात मान कर कुएं में देखा तो उसे खुद की परछाई देखी तो उसे लगा कि ये तो दूसरा शेर है और उसने जोर से दहाड़ा। कुएं के अंदर से उसे उसी की दहाड़ वापस सुनाई दी।

उसे बहुत गुस्सा आया। उसने दूसरे शेर को मारने के लिए कुएं में छलांग लगाई।

कुआ बहुत ही गहरा था शेर उस कुएं में डूब कर मर गया।

खरगोश की चतुराई से सारे जानवरों ने मिल कर उसे शाबाशी दी।

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About Devashish Markam

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