बीरबल की खिचड़ी। Birbal ki khichdi। Akbar and Birbal Story in Hindi

0 Shares

बीरबल अपनी बुद्धिमानी और चतुराई से बहुत नाम कमाया था। बीरबल की टिपण्णी और चुटकुले से राजा अकबर मनोरंजित हो जाते थे। अकबर, बीरबल की बुद्धिमानी और चतुराई से बहुत ही प्रसन्न थे।

एक बार अकबर और बीरबल तालाब किनारे बातें कर रहे थे । एक ठंडी हवा का झोंका उन दोनों के पास से गुजरता है। जैसे-जैसे हवा बढ़ती है वैसे-वैसे मौसम और भी ठंडा होने लगता है।

अकबर अपने हाथों को तालाब के पानी में डालते है और तुरंत ही बाहर निकाल लेते है। पानी इतना ठंडा हो चुका होता है कि उस पर हाथ भी नहीं रखा जा सकता था अचानक अकबर के दिमाग में एक विचार आ जाती है।

अकबर:- बीरबल क्या तुम्हें लगता है कि कोई भी आदमी पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है ?

बीरबल:- जी हुजूर एक आदमी पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है, अगर उसे पैसे की सख्त जरूरत हो।

अकबर इस बारे में फिर सोचते है।

अकबर:- मैं तुम्हारी बात से सहमत नहीं हूं, मुझे नहीं लगता कि कोई भी इंसान इस तालाब के ठंडे पानी में रात तक रह सकता है, चाहे उसे पैसे की कितनी भी जरूरत हो।

बीरबल:- पर हुजूर मैं बिना कोई कठिनाई के ऐसे आदमी को ढूंढ सकता हूं जो इस तालाब के पानी में पूरी रात रह सकता है।

अकबर:- ठीक है बीरबल।

बीरबल:- मैं आपसे शर्त लगा सकता हूं, अगर मैं कोई ऐसा इंसान ढूंढ लाऊ जो इस पानी में पूरी रात खड़ा रह सकता है तो क्या आप उसे 1000 सोने के मोहरे देंगे। मुझे एक हफ्ते का समय मिल सकता है।

अकबर:- ठीक है, मैं इस बात से सहमत हूं।

यह कहते हुए दोनों महल चले जाते हैं। अगले दिन से बीरबल उस इंसान की खोज शुरू कर देते है और दूर-दूर तक ढूंढने लगते है। बीरबल ढूंढता ढूंढता गांव की तरफ निकल पड़ते है और उसे एक आदमी अपनी झोपड़े के बाहर बैठा उदास दिखता है। बीरबल तुरंत ही उसके पास जाते है।

बीरबल:- इस तरह तुम इतने उदास क्यों बैठे हो ?

आदमी सिर उठाता है और बीरबल को देखता है।

गरीब आदमी:- मैं बहुत ही बड़ी परेशानी में हूं क्या आप मुझे सहायता कर सकते हैं। मेरी बेटी का विवाह अगले हफ्ते हैं और मुझे पैसों की सख्त जरूरत है, क्या आप मुझे पैसे दे सकते हैं ? मेरे पास ना की जमीन है और ना ही कोई मुझे पैसे देने को तैयार है।

ये कहते हुआ गरीब आदमी रोने लगता है। उस आदमी को रोता देख बीरबल को तरस आ जाता है और उसे महसूस होता है कि वह जिस आदमी को ढूंढ रहा था वह आदमी उसे मिल चुका है।

बीरबल:- मैं तुम्हे पैसे नहीं दे सकता पर सहायता जरूर कर सकता हूं। अगर तुम एक चुनौती मंजूर करते हो तो तुम अपनी मदद खुद कर सकते हो।

आदमी को एक उम्मीद की किरण दिखती है।

गरीब:- हां ठीक है मैं करूंगा।

बीरबल:- तुम्हें सहर किनारे एक तालाब में पूरी रात खड़े रहना है, ठंडे पानी में और वहां से 1 मिनट भी नहीं हिलना, अगर तुम यह करने में सक्षम हो जाते हो तो राजा तुम्हें 1000 सोने के सिक्के देंगे इनाम के तौर पर।

गरीब:- ठीक है हुजूर, मैं स्वीकार करता हूं। मैं आपसे वादा करता हूं कि मैं उस तालाब के ठंडे पानी में, मैं रात भर खड़ा रहूंगा।

बीरबल उस आदमी को अपने साथ महल ले चलता है और उसे राजा अकबर के सामने प्रस्तुत करता है।

बीरबल:- हुजूर यह आदमी आपकी चुनौती स्वीकार करता है।

राजा अकबर उस आदमी को गौर से देखते है।

राजा अकबर:- अगर यह तैयार है तो इस आदमी को आज रात उस तालाब के ठंडे पानी में रात भर खड़े होने का मौका दिया जाए।

उस रात को गरीब आदमी तालाब के ठंडे पानी में अकेला बीच में खड़ा हो जाता है। अकबर अपने कुछ सैनिकों को उसके आस-पास खड़े होने को कहते हैं ताकि वह आदमी पैसे के लिए धोखा ना कर सके।

उस रात उस आदमी को तालाब के बीच में खड़े रहने को कहते है और तालाब के किनारे 2 सैनिक उसे पहरा दे रहे होते है। उस रात वह आदमी बिना अपनी जगह से हिला सारी रात गुजरता है।

अगली सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण दिखाई देती है उस वक़्त आदमी को तालाब से बाहर निकलने की इजाजत मिलती है। सैनिक उसे राजा अकबर के पास ले चलते हैं।

राजा अकबर:- सैनिकों, क्या यह आदमी तालाब से बाहर निकला था या नहीं ?

सैनिक:- नहीं हुजूर, ये आदमी एक पल के लिए भी उस तालाब के ठंडे पानी से बाहर नहीं निकला।

अकबर चौक जाते है और उस आदमी से पूछते है।

राजा अकबर:- तुमने उस ठंडे पानी में खड़े रह कर सारी रात कैसे बिता लिया।

गरीब:- मैं अपनी आंख वहां के पास वाले एक लालटेन पर गड़ा रखी थी जो तालाब के किनारे था। जब वह लालटेन चलता था तब मेरी ध्यान खींचता था। लालटेन जलता देख मैं तालाब के ठंडे पानी में रात भर रह पाया ओर तलब के बाहर नहीं निकला।

अकबर:- तुमने तालाब के ठंडे पानी मैं उस लालटे के जरिए गर्मी ली और उस ठंडे पानी में पूरी रात रह सके, ये तो नाइंसाफी है। तुमने गलत तरीकों से चुनौती जीती है अब तुम्हें कोई भी इनाम नहीं मिलेगा।

यह सुनकर गरीब आदमी चौक जाता है और वह तुरंत बीरबल के पास मदद के लिए जाता है।

बीरबल के पास वह गरीब आदमी रोता हुआ पहुंचता है और अकबर के दरबार में हुई सारी बात विस्तार में बताता है। बीरबल अकबर के नतीजे से ना खुश होते है। बीरबल कुछ देर सोचते है और उस आदमी से कहते है कि वह अपने घर लौट जाए वह जल्द ही इसका हल ढूंढ कर उसे उसके ईनाम के पैसे लौटा देंगे।

अगले दिन सुबह जब बीरबल अकबर की अदालत में नहीं आते तो अकबर को उसकी गैर मौजूदगी का अभ्यास होता है और सोचते है कि बीरबल अभी कहां होंगे।

अकबर अपने एक सैनिक को अकबर के घर जाकर पता लगाने को कहते है। कुछ देर बाद सैनिक समाचार ले कर आता है।

सैनिक:- महाराज, बीरबल खिचड़ी बनाने में व्यस्त है। बीरबल ने कहा है कि वह तभी आएंगे जब उनकी खिचड़ी तैयार हो जाएगी।

राजा अकबर, बीरबल का इंतजार करते करते एक पूरा दिन निकाल देते है।

अगली सुबह बीरबल अदालत में नहीं दिखते तो राजा अकबर सोचते हैं कि वह खुद बीरबल के घर जा कर देखें कि बीरबल अब तक क्या कर रहे हैं।

जब राजा अकबर बीरबल के घर पहुंचते हैं तो वह देखते हैं कि बीरबल अपने आंगन में आग लगा कर 5 फीट ऊपर एक मटके को गर्म करते देखते है। उस मटके में चावल, अनाज और पानी भरा हुआ होता है। अकबर और सैनिक बीरबल को देख हंस पड़ते हैं।

अकबर:- तुम्हें पता है बीरबल, तुम क्या कर रहे हो ?

बीरबल:- जहांपनाह, मैं खिचड़ी बना रहा हूं।

अकबर:- तुम्हारे साथ क्या गलत हुआ है बीरबल, क्या तुम्हे लगता है कि आप चावल की मटकी को आग से 5 फुट ऊपर लटकाकर खिचड़ी बन पाएंगे।

बीरबल:- जी हुजूर, अगर एक गरीब आदमी, दूर जल रहे टिमटिमाती हुई लालटेन से गर्मी ले सकता है तो मै भी आग के 5 फीट ऊपर मटका लटका कर खिचड़ी बना सकता है।

बीरबल की बातें सुन कर राजा अकबर को अपनी गलती का एहसास हो जाता है।

अकबर:- बीरबल, मै तुम्हारी बुद्धिमानी से एक बार फिर प्रसन्न हुआ। तुमने एक बार फिर से मदत की एक अच्छा निर्णय लेने में।

राजा अकबर गरीब आदमी को बुलाते है ओर उस 1000 सोने के सिक्के ईनाम के तौर पर देते है।

गरीब बहुत खुश होता है। गरीब राजा अकबर और बीरबल को शुक्रिया कर उन्हें अपनी बेटी की शादी में आमंत्रित करता है।

0 Shares
About Devashish Markam

Hi I am Devashish Markam and I'm the co-founder of hindistoryhub.inand we can assure you that we will keep you updated with the best Hindi stories out there.Until then Goodbye.

Leave a Reply

0 Shares
Copy link