भिखारी और करोड़पति। Bhikhari aur Crorepati Kids Story in Hindi

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एक दिन एक अमीर व्यापारी किसी काम से दूसरे गांव जा रहा होता है। रास्ते से चलते हुए उसे एक भिखारी दिखाई देता है।

भिखारी अपने आस पास से गुजर रहे लोगों से भीख मांग रहा होता है।

व्यापारी भिखारी को देख उसकी बुरी क़िस्मत पर हस कर कहता है ” भिखारी तुम्हारी किस्मत इतनी खराब है, मैं अगर तुम्हे भीख दूंगा तो मेरी भी किस्मत खराब हो जाएगी। “

” कुछ तो दे दीजिए मालिक ” भिखारी कहता है।

व्यापारी अपनी जेब से एक कागज का टुकड़ा निकाल कर उसके पास फेक कर चला जाता है।

भिखारी उस फेके हुए कागज को पैसा समझ उसे उठा लेता है।

उस कागज के टुकड़े पर कुछ शब्द लिखे होते है जिसे वो पढ़ता है।

” किस्मत एक सिक्का है, जिसका दूसरा पहलू है मेहनत “

उसे पढ़ भिखारी सोच में पढ़ जाता है और अपने झोले में से एक सिक्का निकाल कर उसे हवा में उछालता है।

सिक्का उछाल कर उस सिक्के को अपने दोनो हाथो के बीच दबा देता है और मन ही मन सोचता है ” चित आए तो मेहनत “

कुछ साल बीत जाते है। व्यापारी का व्यापार घाटे में चला जाता है और नौकरी ढूंढने के लिए उसी गांव वापिस जाने की सोचता है।

गांव में उसे एक मंदिर नजर आता है वो उस मंदिर जा कर प्रार्थना करने की सोचता है।

व्यापारी मंदिर के पास जाते ही उस एक खूबसूरत सी फूलों की दुकान दिखाई पड़ती है। वो थोड़े फूल खरीदने की सोचता है।

व्यापारी फूल वाले के पास जा कर कहता है ” सुनो एक फूल देना “

फूल वाले ने व्यपारी को देख कर कहता है ” आप, आपने मुझे पहचाना “

व्यापारी सोच में पड़ जाता है और उससे पूछता है ” नहीं, क्यों? क्या हम पहले कभी मिले है? “

फूल वाला मुस्कुराते हुए जवाब देता है ” हा, बहुत साल पहले, वैसे आप इतने परेशान क्यू लग रहे हो “

व्यापारी को अभी भी वो इंसान याद नहीं आता।

व्यापारी सोचने पर भी उस इंसान को पहचान नहीं पाता। व्यापारी को अब उस इंसान को जान्नें की उत्साह में व्यापारी फूल वाले से पूछता है ” वो सब रहने दीजिए, क्या आप मुझे ये बता सकते हो कि हम पहले कब और कहा मिले ? “

इस बात पे वो इंसान अपनी दुकान पे लगे एक फ्रेम कि तरफ इशारा करता है।

व्यापारी जा कर उस फ्रेम पे वो शब्द पढ़ता है।

” किस्मत एक सिक्का है, जिसका दूसरा पहलू है मेहनत “

व्यापारी को याद आता है, ये वही भिखारी है जिसे वो पहली बार रास्ते में भीख मांगते हुए मिला था।

” ये सीख मुझे इस कागज के टुकड़े से मिली है जो आपने मुझे दिया था। अगर मैंने सिक्का उछाला नहीं होता और मेहनत ना करता तो आज मै यहां नहीं होता। “

सीख:- मेहनत ही सफलता का गुरुमंत्र है।

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About Devashish Markam

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