भिकरान बनी डॉक्टर। Bhikaran Bani Doctor। Motivational Kids Story in Hindi

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एक बार की बात है काशीपुर नाम के एक गांव में जगन नाम का एक भिकरी अपनी बेटी गौरी के साथ रहा करता था।

गौरी की मां का देहांत हो चुका था और जगन को ठीक से दिखाई नहीं देता था इसी वजह से उन्हें कहीं काम भी नहीं मिलता।

मजबूरन जगन को पेट पालने के लिए अपनी बेटी गौरी के साथ भीख मांगना पड़ता लेकिन गौरी को भीख मांगना पसंद नहीं था। वह पढ़ाई लिखाई करना चाहती थी।

जब भी गौरी पिता के साथ गांव के सेठानी के घर भीख मांगने पहुंची तो वहां उनके बेटे राजू को पढ़ते लिखते देख उसे खुद के लिए बहुत बुरा लगता और यह देख सेठानी ताने देती।

लोगों को पढ़ता लिखता देख गौरी ने भी डॉक्टर बनने की ठान ली और गांव में एक अस्पताल खोलने की सोची।

एक दिन गौरी ने अपने पिता को मंदिर के बाहर रहीम चाचा के पास बैठा दिया और वह खुद कई दिनों तक खिलौने गांव में बेचकर पैसे कमाने लगी और फिर एक दिन गांव के शिक्षिका से मिलकर सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने जाने लगी।

गौरी रोज स्कूल से आने के बाद खिलौने भेजती और पैसे कमाते और अपने पिता को देखभाल करती गौरी रात रात भर जाग कर पढ़ाई करती और हमेशा क्लास में अच्छे नंबर से पास होती।

गौरी की हिम्मत और सफलता देख सेठानी और अन्य गांव के लोग हैरान थे और वह जगन और गौरी से जलने भी लगे थे।

गौरी हर साल अच्छे अंको से पास होती और शिक्षिका रेनू भी गौरी की पढ़ाई में खूब मदद करती। धीरे-धीरे समय गुजरता गया और गौरी बड़ी हो गई।

उसने अपनी मेहनत और लगन से अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी की और आगे डॉक्टर बनने की पढ़ाई पूरी करने के लिए कॉलेज में एडमिशन के लिए परीक्षा दी और उसने टॉप भी किया। यह खबर सुनकर गौरी के पिता और शिक्षिका रेनू दोनों बहुत खुश हुए।

लेकिन अब गौरी को अपने पिता को छोड़कर अपनी पढ़ाई के लिए शहर को जाना था।

गौरी पढ़ाई के लिए शहर चली गई।

समय के साथ-साथ गौरी अपने सपनों की तरफ बड़ी तेजी से कामयाबी की ओर बढ़ रही थी।

कुछ साल बाद गांव में महामारी की बीमारी तेजी से फैल गई रेनू के पिता सेठानी और उसका बेटा राजू बहुत बीमार हो गए और नगर के छोटे से सरकारी हॉस्पिटल में पड़े रहे।

पर कई दिनों से कोई डॉक्टर नहीं आया सभी बहुत उदास दुखी भगवान से जिंदगी की प्रार्थना करने लगे।

तभी एक नर्स ने सभी को खबर दी ” शहर से सबसे बड़ी डॉक्टर साहिबा इलाज करने आने वाले हैं “ यह सुन सारे गांव वाले बहुत खुश हो गए।

तभी हॉस्पिटल के सामने एक कार आकर रुकी और उसमें से एक डॉक्टर उत्तरी नगर सरपंच ने उसे माला पहना कर उसका स्वागत किया।

जब वह डॉक्टर हॉस्पिटल के अंदर घुसी तो सारे गांव वाले उसे देखकर हैरान रह गए क्योंकि वह डॉक्टर कोई और नहीं बल्कि गौरी थी।

गौरी ने अपने पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उसने सभी गांव वालों का इलाज करना शुरू किया गौरी के इलाज से कुछ ही दिनों में सभी ठीक हो गए।

गौरी ने अपने पिता की आंखों का ऑपरेशन करवा कर उनकी आंखो की रोशनी भी वापिस लाई।

गौरी की लगन और सफलता की वजह से एक बार फिर सारा गांव महामारी से मुक्त हुआ।

सारे गांव वाले को अपनी गलती का एहसास हुआ वह सभी गौरी को फूल मालाओं का हार पहनाया। उसके नाम का जय जय कार करने लगे। यह देख गौरी के पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

शिक्षा:- अगर मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय से किसी काम को किया जाए तो उसमें हमें कामयाबी जरूर मिलते हैं।

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About Devashish Markam

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