भगवान कहां है ?। Bhagwan kaha hai ? Kids Cartoon Story in Hindi

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किसी गांव में रामलाल नाम का एक आदमी अपने परिवार के साथ रहता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी और उसके दो बेटे राम और श्याम भी रहते थे।

राम और श्याम बहुत शरारती थे। एक दिन राम और श्याम की अध्यापिका दोनों बच्चों को साथ लेकर उनके घर आती है।

पिता:- अध्यापिका जी आज आप यहां, कैसे ? विद्यालय में सब ठीक तो है।

अध्यापिका:- जी, अभी तक तो सब ठीक था अगर आपके बेटे कुछ दिन और रहे तो पता नहीं विद्यालय रहेगा या नहीं।

पिता:- नालायको, इस बार कौन सी शरारत कर आए।

अध्यापिका:- यह क्या बोलेंगे मैं बताती हूं, यह दोनों आज विद्यालय में क्या कर आए हैं पहले तो इन दोनों ने गणित की कक्षा में अध्यापक के ऊपर छिपकली फेक दी और स्कूल की छुट्टी की घंटी समय से पहले ही घंटी बजा दी। जिस से समय से पहले सभी बच्चे अपने घर चले गए।

अध्यापिका की बात सुनते ही रामलाल गुस्से में लाल हो जाता है और दोनों बेटे पर चिल्लाता हैं।

रामलाल (पिता):- तुम दोनों ने बहुत उधम मचा रखा है और अब विद्यालय में भी बहुत शरारत कर रहे हो, रुको अभी तुम दोनों को बताता हूं।

तभी राम और श्याम बोलते हैं:- पिताजी हमारे शरारत करने की एक वजह थी। गणित की कक्षा के समय जब अध्यापक गणित पढ़ा रहे थे तो सभी बच्चे सो रहे थे तभी हमने अध्यापक के ऊपर छिपकली फेंक दे जिसकी वजह से अध्यापक चीख पड़े और सारे बच्चे जाग गए। इसके बाद जब हमने यह सुना कि प्रधान अध्यापक आपको बुलाने वाले हैं हमारी शिकायत बताने के लिए तभी हमने स्कूल छुट्टी की घंटी बजा दी ताकि आपको स्कूल ना आना पड़े पिताजी।

यह सुनते ही रामलाल गुस्से से लाल हो जाता है और कमरे के कोने में पड़ी हुई लाठी को लेकर उनके पीछे पीटने के लिए दौड़ता है।

उसी वक़्त राम और शाम की मां बाजार से घर पहुंचती हैं। रामलाल लाठी पकड़कर बच्चों के पीछे भागता देख रामलाल की पत्नी घबरा जाती है।

पत्नी:- क्या हुआ ?

रामलाल:- अपने बच्चों से पूछो।

राम ओर श्याम की मां अपने बच्चों से पूछने वाली रहती है उससे पहले ही राम और श्याम बोल पड़ते हैं।

राम ओर श्याम:- मां, पिताजी ने आपका पसंदीदा घड़ा तोड़ दिया और जब हमने पूछा ऐसा क्यों किया तो वह तो हमारे पीछे लाठी लेकर हमें पीटने के लिए दौड़ने लगे।

बिना कुछ सूने राम और श्याम के मां गुस्से से आगबबूला हो जाती हैं और रामलाल के पीछे लाठी लेकर उसे पीटने दौड़ती हैं। राम और श्याम बहुत हंसते हैं, मजे लेते हैं और फिर घर से बाहर घूमने निकल जाते हैं।

राम और श्याम अपने गांव के बीच एक बड़ी सी पेड़ के पास खड़े हो यह सोचते हैं कि आज और किसे परेशान किया जाए। तभी उनके सामने से एक आदमी टोकरी में फल ले बाजार की तरफ बढ़ता रहता है। तभी उन दोनों को एक शैतानी सूझति है।

बड़े से पेड़ के पास से एक टहनी तोड़ पेड़ के पीछे खड़े हो जाते हैं। जैसे ही आदमी उसकी तरफ पहुंचता है वह पेड़ की टहनी उसकी टोकरी में फेक देते हैं।

आदमी को लगता है कि एक सांप उसकी टोकरी में गिर गया है और वह टोकरी फेक वहां से भागता जाता है। शरारत करने के बाद राम और श्याम हंसते रहते हैं तभी उनके पीछे से गांव का एक बुजुर्ग, राम ओर श्याम की शैतानी देख लेता है और यह बात अपने सरपंच मुख्य को बता देता है।

यह बात सुनकर सरपंच राम और श्याम के पिता रामलाल को अपने पास बुलाते हैं।

सरपंच:- तुम्हारे बेटे की शरारतें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अगर उन दोनों ने शरारत बंद नहीं की तो मुझे ही कुछ कदम उठाना पड़ेगा।

यह सुनते ही रामलाल चिंतित हो जाता है और अपने दोनों बेटों को शरारतें कम करने के लिए तरकीब ढूंढता है तरकीब ढूंढते ढूंढते वह गांव के बाहर एक बाबा के पास जाता है। जो कि गांव से 5 किलोमीटर दूर एक झोपड़े में रहता था।

रामलाल:- बाबा, मेरे दो बेटे है बहुत ही शरारती। आप उन दोनों को थोड़ी बुद्धि और उनकी शरारत कम करवा दे।

बाबा:- ठीक है, अपने बेटों को लेकर आ जाना।

यह सुनते ही रामलाल अपने घर जाता है और अपने दोनों बेटों को लेकर बाबा के पास जाता है।

बाबा:- अपने बेटों को कुछ समय के लिए यहां छोड़ कर अपने घर चले जाओ।

रामलाल, बाबा की बात पर गौर करते हुए रामलाल अपने दोनों बेटों को बाबा के पास छोड़ अपने घर चला जाता है। बाबा रामलाल के दोनों बेटों से एक सवाल पूछते हैं।

बाबा:- भगवान कहां है ?

रामलाल के दोनों बेटे आश्चर्य से बाबा को देखते हैं।

राम और श्याम:- हमें नहीं पता, हमने नहीं छुपाया।

बाबा:- (फिर वही सवाल पूछते है) भगवान कहां हैं ?

दोनों बच्चे डर जाते हैं।

राम और श्याम:- (फिर वही कहते हैं) हमें कुछ नहीं पता, हमने आपके भगवान को नहीं छिपाया, हमें कुछ भी नहीं पता भगवान के बारे में।

बाबा:- (एक बार फिर से दोनों बच्चों को पूछते है) भगवान कहां है ?

इस बार दोनों बच्चे और भी डर जाते हैं और वहां से भाग कर अपने घर जा कर पिताजी से लिपट जाते है।

राम और श्याम:- पिताजी हमे पता नहीं कि भगवान कहां है, हमने किसी भगवान को नहीं छिपाया।

रामलाल अपने दोनों बेटों को पहली बार घबराया देख यह सोचने लगता है कि अगर उसके दोनों बेटे कुछ समय तक बाबा के साथ और रहे तो शायद उन दोनों की शैतानियां बंद हो जाएंगी। यह सोचकर रामलाल अपने दोनों बेटों को लेकर फिर से बाबा के पास जाता है।

रामलाल:- बाबा इन्होंने शायद मस्ती मस्ती में भगवान को कहीं छिपा दिया होगा, अगर आप इसे इन्हें यहां रखे और पूछे तो शायद इन्हें याद आ जाए कि भगवान कहां रखकर भूल गए। जैसे ही इन्हें याद आयेगा ये आपको बता देंगे।

यह सुन बाबा रामलाल को आश्चर्य से देखते हैं।

रामलाल:- बाबा मै अपने बच्चो को आपके पास कुछ समय के लिए छोड़ जाता हूं।

बाबा:- (हैरान हो जाते हैं) ठीक है।

बाबा, राम और श्याम दोनों को अपने घर की साफ सफाई करने को कहते हैं पर रामलाल के दोनों बेटे सफाई से मना कर देते हैं।

बाबा:- (उनसे सवाल पूछता है) भगवान कहां है ?

राम और श्याम:- बाबा हमें नहीं पता भगवान कहां हैं।

राम और श्याम बाबा के घर की साफ सफाई करने लगते हैं। बाबा सुबह शाम बच्चों से एक ही सवाल पूछा करते हैं भगवान कहां हैं और उन्हें काम करने को कहते हैं।

कई दिन बीत जाते हैं और उन्हें अपने सवालों का जवाब नहीं मिलता एक दिन राम और श्याम आश्रम की साफ सफाई करते हुए बहुत ही थक जाते हैं और सोचते हैं कि अगर बाबा की सवालों का जवाब नहीं मिला तो वह दोनों आश्रम में ही साफ-सफाई करते रह जाएंगे और आश्रम में ही कैद हो जाएंगे।

एक दिन दोनों भाई घूमते-घूमते बाबा का प्रवचन सुनने लगते हैं।

बाबा:- हमे, कभी किसी से झूठ नहीं बोलना चाहिए ना कि जान बुच कर किसी का नुकसान नहीं करना चाहिए जिसका नमक खाया हो उसे कभी दुखी नहीं करना चाहिए और अपनी समस्या से भागने के बजाय उसका हल ढूंढना चाहिए।

यह सुनने के बाद दोनों भाई सोचने लगते है वो अपने शैतानियां से कितनो को झूठ बोलकर दूसरों का मजाक उड़ाया और दूसरों को लड़ता देखते कैसे मजे ले रहे थे और अपने माता-पिता का नमक खा कर उन्हें ही परेशान कर रहे थे।

प्रवचन सुनने के बाद दोनों साईं बाबा के पास जाते हैं और अपने किए की माफी मांगते हैं। बाबा उन दोनों की बातें सुन कर बहुत खुश हो जाते है। राम और श्याम बाबा को यह कहकर साफ सफाई पर लग जाते हैं पर फिर भी उन दोनों को उनके सवालों का जवाब नहीं मिलता।

कुछ दिन बीत जाते हैं, राम और श्याम एक दिन फिर बाबा का प्रवचन सुनने लगते है।

बाबा:- भगवान हमारे दिल में है। हमें भगवान को ढूंढने की जरूरत नहीं अगर भगवान को ढूंढना ही है तो हमारे दिल में ढूंढना चाहिए। हर इंसान में भगवान होता है।

यह सुनकर दोनों भाई खुश हो जाते हैं और और बाबा की प्रवचन खत्म होते ही दोनों भाई बाबा के पास जाते हैं और बाबा की प्रवचन में कही बातें बाबा को सुना देते हैं।

बाबा उन दोनों की बातें सुन खुश हो जाते हैं और और दोनों बच्चों को घर भेज देते हैं।

दोनों बच्चे घर जाते ही अपने माता-पिता ओर गांव स्लके सभी सदस्यों से माफी माफी मांगते है। राम और श्याम के माता-पिता और सारे गांव के सदस्य उनकी गलतियों का पछतावा होता देख उन दोनों को माफ कर देते है।

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About Devashish Markam

Hi I am Devashish Markam and I'm the co-founder of hindistoryhub.inand we can assure you that we will keep you updated with the best Hindi stories out there.Until then Goodbye.

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