आलसी गधा। Aalsi Gadha। Cartoon Story in Hindi

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एक समय की बात है। एक गांव में एक व्यापारी रहता था। उसने बहुत सारे पालतू जानवर पाल रखे थे, जो की बहुत ही वफादार और कुशल थे।

उन सब में एक जानवर ऐसा था जो बहुत ही आलसी और काम चोर था।

व्यापारी:- ये आलसी गधा अभी भी सो है क्या ? कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा। उसे आज नमक के बोरे ढोने है।

बंदर:- मालिक मै जा कर देखता हूं।

बंदर एक बाल्टी पानी ले कर गधे के पास जाता है।

बंदर:- आलसी गधे जल्दी उठो, तुम्हे आज नमक के बोरे ढोने है।

गधा:- ( गुस्से से ) तुम जाओ, मुझे कुछ देर और सोना है।

बंदर:- इस आलसी गधे की नींद अभी भागता हु।

ये कहते हुए बंदर बाल्टी की पानी गधे के ऊपर डाल देता है।

गधा गुस्से से लाल हो जाता है और सोचता है ” ये बंदर हमेशा मालिक की चापलूसी करता है, इसे एक दिन भारी बोझ उठाना पड़ जाए ना तब इसे पता चलेगा कि बोझ उठाना कितना मुश्किल काम होता है। “

व्यापारी नमक की बोरी ला कर गधे की पीठ पर रख देता है।

व्यापारी:- हम कुछ दिनों के लिए नमक का व्यापार करेंगे।

गधा:- जी मालिक।

बंदर:- शाबाश गधे शाबाश।

गधा बंदर को गुस्से से देखता है और बंदर को लात मारता है।

व्यापारी:- इतना सारा काम पड़ा है और तुम दोनों को मजाक की पड़ी है।

व्यापारी और गधा बाजार की ओर निकल पड़ते है। गधा अपने काम से बिलकुल भी खुश नहीं था।

व्यापारी:- जल्दी चलो।

गधा:- मालिक मै बहुत थक गया हूं।

व्यापारी:- अपना आलसी पन मात दिखाओ और जल्दी चलो।

गधे की थकने का नाटक मालिक के सामने नहीं चल पाया।

व्यापारी के घर और व्यापार के स्थान के बीच एक नदी पार करनी पड़ती है।

गधा नदी को देख उसे गर्मी लगने लगती है और पानी में डुबकी मारने की सोचता है।

गधा नदी के बीच में जा कर फिसलने का नाटक करता है।

व्यापारी गधे की फिसलता देख घबरा जाता है।

व्यापारी:- ये क्या कर रहे हो ?

गधा:- वाह, बोझ तो बहुत कम ही गया है।

व्यापारी:- बेवकूफ गधे तुम्हे पता है तुम्हारी वजह से क्या हुआ है। सारा नमक पानी में घुल गया।

गधा:- मुझे माफ़ कर दीजिए मालिक, मै फिसल गया।

व्यापारी:- ठीक है, पर तुम्हे कोई चोट तो नहीं लगी।

गधा:- नहीं मालिक।

व्यापारी गधे से निराश हो जाता है। निराश व्यापारी गधे को ले कर अपने घर निकाल पड़ता है।

गधा सोचता है ” मुझे ये जबरदस्त तरकीब पहले क्यू नहीं सूझी। ”

गधे को समझ आ गया था कि पानी में भीगने के बाद बोरो का भार कम हो जाता है, इसलिए वो रोज रोज जान बुच कर फिसलता और पानी में भीग जाता।

व्यापारी:- दो तीन दिनों से कितना नुकसान चल रह है।

अगले दिन व्यापारी दुबारा नमक की बोरियों का व्यापार करने की सोचता है और गधे के ऊपर नमक की बोरी रख देता है।

बंदर:- गधे आज जरा संभाल कर चलना, मालिक की बोरियों को बर्बाद होने मत देना।

आलसी गधे को मालिक के नुकसान से कोइ लेना देना नहीं था। वो रोज की तरह पानी में जा कर दुपकी लगता था और सारी बोरी बर्बाद कर देता।

एक दिन व्यापारी निराश हो कर अपने नुकसान के बारे में सोच रहा होता है।

बंदर:- क्या हुआ मालिक ?

व्यापारी को गधे पर शक होने लगता है।

व्यापारी:- मुझे लग रहा है कि गधा जान बुच कर गलती कर रहा है।

बंदर:- पर आपको ऐसा क्यों लगा रहा है मालिक ?

व्यापारी:- दाल में कुछ तो काला है। वो हमेशा एक ही जगह पर फिसल है और सारे नमक के बोरे खराब हो जाते है।

गधे को सबक सिखाने के लिए व्यापारी और बंदर को एक तरकीब सूझती है। इस बार नमक की जगह बोरो में रूई भर देते है।

बोरिया गधे की पीठ पर रखते ही गधे को बोरिया बहुत है हल्की लगने लगती है।

गधा सोचता है ” आज तो बोरो का भार बहुत ही कम है, पानी में डुबकी लगाते ही बोरो का भार और भी काम हो जाएगा ” ये सोच गधा जोर जोर से हसने लगता है।

व्यापारी:- किस बात पर तुम्हे हसी आ रही है।

गधा:- कुछ नहीं, बस ऐसे ही।

बंदर:- हस्ना बंद करो और काम पर लगो।

व्यापारी और गधा जब नदी के पास पहुंचते है, गधा डुबकी मारने की सोचता है।

व्यापारी भी मनन ही मनन सोचता है ” आज देखते है, तुम क्या करते हो। “

रोज की तरह गधा नदी में जा कर डुबकी लगता है पर जैसे ही डुबकी लगा कर पानी से बाहर निकालता है बोरो का वजन बहुत बढ़ जाता है।

गधा मनन है मनन सोचता है ” ये बोरो का भार कम ना हो कर इसका भार क्यों बढ़ गया। “

रूई ने बहुत सारा पानी सोख लिया था, जिसके कारण बोरो का भार बढ़ जाता है। गधा बोरो का भार नहीं सह पता और जमीन में गिर पड़ता है।

व्यापारी:- तुम मुझे इतने दिनों से बेवकूफ बना रहे थे। तुम्हारी वजह से मेरा कितना नुकसान हुआ है, तुम्हे इसका अंदाजा भी है। अब तुम्हे अच्छा सबक मिला।

गधा:- मुझे माफ़ कर दीजिए मालिक।

उस दिन के बाद गधे ने अच्छा सबक सीख लिया और कभी फिसलने का नाटक नहीं किया।

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About Devashish Markam

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